छह जिलों में राजीव भवन का हो गया लोकार्पण,हमारे यहां जमीन आवंटन ही नहीं हुआ

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बिलासपुर। मुख्यमंत्री के निर्देश और उनकी बनाई योजना के क्रियान्वयन को लेकर जिले के विभिन्न् विभागों के अधिकारी से लेकर निगम के कमिश्नर कितने गंभीर हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक प्रदेश कांग्रेस कमेटी को राजीव भवन के लिए जमीन का आवंटन नहीं हो पाया है। बस स्टैंड में राजीव भवन के लिए जमीन आवंटन के संबंध में बिलासपुर तहसीलदार ने प्रकरण दर्ज किया था। आलम यह है कि सत्ताधारी दल के दिग्गजों को कांग्रेस शासित निगम कार्यालय का चक्कर काटना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहन मरकाम की मंशा के अनुरूप देश के पूर्व प्रधानमंत्री व भारत रत्न राजीव गांधी की जयंती पर राजीव भवन का लोकार्पण होना था। मुख्यमंत्री व पीसीसी चेयरमैन की मंशा पर प्रदेश के छह जिले के पदाधिकारी खरे उतरे हैं। शुक्रवार को स्व. गांधी की जयंती पर राजीव भवन का लोकार्पण हो गया है। अंबिकापुर, दुर्ग, कोरिया, धमतरी, जगदलपुर और सुकमा में राजीव भवन में शनिवार से जिला व शहर कांग्रेस के पदाधिकारी संगठनात्मक गतिविधियांे को अंजाम देने बैठक करते नजर आएंगे।

कांग्रेस कार्यालय बनाने के मामले में प्रदेशभर में सबसे ज्यादा खराब स्थिति न्यायधानी के दिग्गज कांग्रेसी नेताओं की है। मुख्यमंत्री के करीबी नेताओं से लेकर संगठन के दिग्गज पदाधिकारियों की लंबी कतार है। छह महीने 19 दिन में कांग्रेसी दिग्गज कार्यालय भवन के लिए जमीन आवंटित नहीं करा पाए हैं। अपनी ही सरकार में जमीन आवंटन की फाइल को निकालने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।

जाहिर है कार्यक्षमता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा किरकिरी नगर निगम ने कराई है। निगम में फाइल छह महीने से अटकी पड़ी हुई है। कमिश्नर कार्यालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र के इंतजार मंे अब तक एनओसी मिली और ना ही फाइल आगे सरक पाई है। कांग्रेस के दिग्गजों व पदाधिकारियों को जवाब देते नहीं बन पा रहा है।

फजीहत के बाद अब सामान्य सभा में आया प्रस्ताव

रायपुर से लेकर दिल्ली तक फजीहत कराने के बाद 24 अगस्त को होने वाली सामान्य सभा की बैठक में राजीव भवन के लिए जमीन आवंटन के प्रस्ताव को सामान्य सभा के एजेंडे में शामिल किया गया है। जानकारी के अनुसार प्रस्ताव क्रमांंक 89 में अनुमोदन के लिए रखा गया है। सामान्य सभा की बैठक के लिए 93 प्रस्ताव को शामिल किया गया है। अंतिम सूची में शामिल करने के पीछे दबाव की राजनीति से इसे जोड़कर देखा जा रहा है।