विदिशा। यह लोकसभा चुनाव भले ही कोई लहर वाला न दिखा हो लेकिन मतगणना के दिन ईवीएम में भाजपा की सुनामी दिखाई दे रही है। पहला राउंड पूरा हो गया है और दूसरे राउंड की गिनती शुरू हो गई है। इस गिनती में भाजपा और कांग्रेस के बीच जमीन और आसमान का अंतर दिखाई दे रहा है। कई मतदान केंद्रों पर कांग्रेस इकाई का अंक भी पार नहीं कर पाई है। हर केंद्र पर भाजपा के पक्ष में एकतरफा वोट दिखाई पड़ रहे है। विदिशा और सागर सीट के लिए हुए चुनाव में भाजपा को जहां एक केंद्र पर पांच सौ वोट मिल रहे है वही कांग्रेस 70 और 80 वोट ले रही है।
ये रुझान बता रहे है कि जिले में पांचों विधानसभा क्षेत्रों में विधानसभा चुनाव की तुलना में दोगुना से ज्यादा वोटों से भाजपा जीतेगी। हर विधानसभा क्षेत्र से 50 हजार से अधिक लीड की संभावना जताई जा रही है। विदिशा संसदीय क्षेत्र से भाजपा ने बढ़त बना ली है। विदिशा विधानसभा क्षेत्र से पहले राउंड में शिवराज सिंह चौहान आगे बताए जा रहे है। सागर संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सिरोंज विधानसभा क्षेत्र में पहले राउंड से ही भाजपा ने बढ़त बना ली है। पहले राउंड में भाजपा आगे है।
मध्यप्रदेश की चुनिंदा लोकसभा सीटों में विदिशा भी शामिल है, जिस पर प्रदेश ही नहीं देश भर की नजरें टिकी है। यहां से 18 वर्षों तक मुख्यमंत्री के पद पर काबिज रहे शिवराज सिंह चौहान छठवीं बार चुनाव लड़ रहे है। उनकी जीत को लेकर किसी को संशय नहीं है लेकिन यह जीत कितनी बड़ी होगी, यह जानने की सबको उत्सुकता रहेगी।
विदिशा संसदीय क्षेत्र को भाजपा का गढ़ माना जाता है। आजादी के बाद से अब तक हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सिर्फ दो बार वर्ष 1980 और 1984 में ही जीत हासिल कर सकी है। शेष सभी चुनावों में जनसंघ, जनता पार्टी और भाजपा का ही कब्जा रहा है। वर्ष 1990 से लेकर अब तक बीते 34 वर्षों से इस सीट पर भाजपा के प्रत्याशी ही जीत हासिल करते रहे है। वर्ष 2019 के चुनाव में इस सीट से भाजपा के रमाकांत भार्गव ने कांग्रेस के शैलेंद्र पटेल को 5 लाख 3 हजार मतों से पराजित किया था।
मालूम हो, शिवराज सिंह चौहान विदिशा लोकसभा सीट पर पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेई के उत्तराधिकारी के रूप में आए थे। वर्ष 1990 में वाजपेई ने लखनऊ के अलावा विदिशा से भी चुनाव लड़ा था और दोनों जगह जीत हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने विदिशा सीट छोड़ दी थी। तब हुए उपचुनाव में शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा का चुनाव लड़ा था, उस वक्त वे बुधनी विधानसभा क्षेत्र के विधायक थे। उसके बाद वे वर्ष 2004 तक इसी क्षेत्र से पांच बार सांसद चुने गए। इसके बाद वे प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। इस बार उनका मुकाबला कांग्रेस के प्रतापभानु शर्मा से है। वर्ष 1991 के चुनाव में शिवराज कांग्रेस के प्रतापभानु को ही हराकर पहली बार सांसद बने थे।
यह है विदिशा सीट का इतिहास
विदिशा पहले गुना लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा था। वर्ष 1967 में विदिशा अलग क्षेत्र घोषित किया गया। जिसके पहले सांसद मुंबई के पंडित शिव शर्मा थे। वे जनसंघ के उम्मीदवार थे। वर्ष 1971 में इंडियन एक्सप्रेस के मालिक रामनाथ गोयनका भी यहां से चुनाव जीते। इसके बाद जनता पार्टी से राघवजी, कांग्रेस से दो बार प्रतापभानु शर्मा, फिर राघवजी , अटल बिहारी वाजपेई, शिवराज सिंह चौहान, रामपाल सिंह, सुषमा स्वराज और रमाकांत भार्गव सांसद बने। बीते 17 चुनावों में यहां से 15 बार जनसंघ,जनता पार्टी और भाजपा के प्रत्याशियों ने जीत हासिल की वहीं कांग्रेस सिर्फ दो बार चुनाव जीत हासिल कर सकी।
इस संसदीय क्षेत्र में विदिशा जिले की दो, रायसेन जिले की तीन, सीहोर जिले की दो और देवास जिले की एक विधानसभा सीट आती है। यहां कुल मतदाताओं की संख्या 19 लाख 45 हजार 404 है। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति के मतदाताओं की संख्या 16– 16 फीसद,59 फीसद पिछड़ा वर्ग और सामान्य मतदाता और 9 फीसद मुस्लिम मतदाता है।
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