जबलपुर में ट्रेन में किन्नर बनकर ठगी, RPF ने किया भंडाफोड़

जबलपुर। ट्रेन में किन्नर बनकर यात्रियों से वसूली करने वाले दो पुरुषों को रेल सुरक्षा बल ने गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए आरोपित शातिर है। वह किन्नर बनकर ट्रेन में चढ़ते थे। यात्रियों से वसूली के बाद वेशभूषा बदलकर पुरुष बन जाते थे। पुलिस को चकमा देकर भाग जाते थे। रेल कंट्रोल को गुरुवार को वेरावल-जबलपुर सोमनाथ एक्सप्रेस में दो किन्नरों के यात्री के साथ मारपीट करने की शिकायत मिली। रेल सुरक्षा बल ने तुरंत शिकायतर्कता यात्री विनोद जैन से संपर्क किया।
यात्रियों के साथ अभद्रता एवं हाथापाई
पता चला कि घटना नरसिंहपुर-जबलपुर के बीच हुई। इस पर आरपीएफ ने ट्रेन के मदन महल स्टेशन पर पहुंचने पर सर्चिंग की। इस दौरान दोनों फर्जी किन्नरों को पकड़ा गया। पकड़े गए आरोपितों में मूलत: पन्ना जिला के पवई पड़रिया कला निवासी उमेश कुमार दहायत और उसका भाई रजनीश कुमार दहायत है। आरोपितों ने यात्रियों के साथ अभद्रता एवं हाथापाई करना स्वीकार किया है। दोनों के विरुद्ध रेल अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही की गई है।
नरसिंहपुर में बना रखा था ठिकाना
रेलवे कंट्रोल की सूचना पर आरपीएफ एसआई महावीर सिंह, एसआई प्रवीण कुमार मिश्रा, प्रधान आरक्षक धीरेंद्र सिंह एवं आरक्षक रूपा गर्ग का दल गठित किया गया। जिसने दोपहर को ट्रेन के मदन महल स्टेशन पहुंचते ही जांच की। इस दाैरान आरोपित जनरल डिब्बे में छिपे मिले। उनके बिना ट्रेन का टिकट नहीं था। पूछताछ में पता चला कि दोनों आरोपितों ने अभी नरसिंहपुर में ठिकाना बना रखा है। जहां पर वह रौसरा में शैलू कुचबंदिया के घर पर किराए से रहते है। नरसिंहपुर से गुजरने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में चढ़ते है। श्रीधाम और गाडरवारा के बीच यात्रियों से बधाई वसूली करते है।
घर से सामान्य वेशभूषा में निकलते थे
आरपीएफ को जांच में पता चला कि दोनों आरोपित रुपये कमाने के लिए किन्नर बनकर ट्रेन में घूमते थे। यात्रियों से बधाई के नाम पर रुपये वसूलते थे। वह घर से पुरुष की सामान्य वेशभूषा निकलते थे। अपने साथ एक थैले में किन्नर जैसे कपड़े लेकर निकलते थे। ट्रेन में चढ़ने के बाद शौचालय में जाकर कपड़े बदलकर किन्नर का रूप धारण कर लेते थे। शिकायत होने पर पुलिस ढूंढती तो शौचालय में जाकर तुरंत कपड़े बदलकर शर्ट-पेंट पहनकर अपने वास्तविक रूप में आ जाते थे। वसूली के बाद जब घर लौटते तब भी वह किन्नर का रूप नहीं रखते थे। ताकि कोई उन्हें पहचान न सकें।
किन्नर गुरू को देते थे पांच सौ रुपये प्रतिदिन
आरपीएफ को जांच में श्रीधाम से गाडरवारा के बीच फर्जी किन्नरों की टोली के सक्रिय होने का पता चला है। आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि गंगा एवं काजल किन्नर भी उनकी साथी है। वह भी ट्रेनों में यात्रियों से बधाई वसूली करती है। उनके गुरू पायल किन्नर है। ट्रेन में चलने और बधाई वसूलने के एवज में गुरू पायल किन्नर उनसे प्रतिदिन पांच सौ रुपये वसूलती है। आरपीएफ अब पकड़े गए दोनों आरोपितों के साथी तीनों किन्नर की तलाश कर रही है।