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महाराष्ट्र

267 किलो सोना-350 किलो चांदी… 444 करोड़ रुपये का बीमा, कहां विराजे हैं सबसे अमीर गणपति?

महाराष्ट्र की मुंबई अपने भव्य गणेशोत्सव के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. पूरे शहर में गणेश चतुर्थी को लेकर जगह-जगह पंडाल बने हैं. लेकिन अगर सबसे अमीर और सबसे भव्य सजावट की बात करें तो माटुंगा में स्थित गणपति पंडाल सबसे आगे है. यहां बीते सात दशकों से लगातार गणेशोत्सव मनाया जा रहा है और हर साल बप्पा की शोभा और वैभव में और इज़ाफा होता है.

इस बार आयोजन की सबसे खास बात यह है कि विघ्नहर्ता गणपति बप्पा को 267 किलो सोने के आभूषणों से सजाया गया है. इतना ही नहीं, बप्पा का सिंहासन भी अत्यंत भव्य है, जिसे 350 किलो चांदी से तैयार किया गया है. जब भक्तजन बप्पा के दरबार में पहुंचते हैं, तो उनकी छटा देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं.

भक्तों की आस्था का आलम यह है कि हर साल मुंबई में लालबाग के राजा के बाद सबसे अधिक भीड़ जीएसबी सेवा मंडल गणपति में उमड़ती है. यहां न केवल मुंबईकर, बल्कि देश के कोने-कोने से श्रद्धालु बप्पा का आशीर्वाद लेने आते हैं.

444 करोड़ रुपये का बीमा भी कराया गया

जीएसबी सेवा मंडल ने इस बार 444 करोड़ रुपये का बीमा भी कराया है. बीमा कवर में केवल आभूषण ही नहीं, बल्कि पंडाल, भक्तों की सुरक्षा और आयोजन से जुड़े अन्य पहलू भी शामिल किए गए हैं. पिछले वर्ष यह बीमा करीब 422 करोड़ रुपये का था, यानी इस बार इसमें 22 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है. सिर्फ बप्पा के आभूषणों की ही कीमत बाजार में लगभग 70 करोड़ रुपये आंकी गई है.

गणेशोत्सव में सिर्फ आभूषणों की चमक ही नहीं, बल्कि भक्ति और सेवा का भाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है. यही वजह है कि जीएसबी सेवा मंडल की ओर से यहां आने वाले भक्तों के लिए चौबीसों घंटे प्रसाद और भोजन की व्यवस्था की गई है. भक्त अपने गणपति का दर्शन करने के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं और इसे बप्पा का आशीर्वाद मानकर तृप्त होते हैं.

सालों से चली आ रही परंपरा

70 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा ने माटुंगा के गणपति को एक अनोखी पहचान दी है. बप्पा का यह दरबार न केवल मुंबई, बल्कि पूरे देश के लिए श्रद्धा, विश्वास और समृद्धि का प्रतीक बन चुका है. हर साल यहां आने वाले भक्त अपने जीवन की खुशहाली और परिवार की भलाई के लिए प्रार्थना करते हैं.

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