इंदौर । नगर निगम का दावा है कि पशुओं को इंदौर शहर से पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है। अन्य शहरों से पशुओं के इंदौर आने पर भी रोक लगा दी है। इधर, याचिकाकर्ता का कहना है कि शहर की सड़कों पर अब भी पशु नजर आ रहे हैं। एक तरफ निगम और शासन पौधारोपण कर हरियाली बढ़ाने का दावा कर रहे हैं, दूसरी तरफ पशु हरियाली को नष्ट कर रहे हैं। निगम के पास इनसे निपटने के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में वर्षाकाल में पौधारोपण करने वाले हतोत्साहित हो रहे हैं।
इंदौर में पशुओं की समस्या को लेकर प्रस्तुत जनहित याचिका में सोमवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिका डूइंग नीडफुल एसोसिएशन यंग पीपुल नामक स्वयंसेवी संगठन ने दायर की है। याचिकाकर्ता की तरफ से एडवोकेट अजय मिमरोट और गगन बजाड पैरवी कर रहे हैं। याचिका में कहा है कि प्रति वर्ष वर्षाकाल में बड़ी संख्या में पौधारोपण किया जाता है। दावा किया जाता है कि इससे हरियाली बढ़ेगी, लेकिन वर्षाकाल में ही राजस्थान से बड़ी संख्या में पशु इंदौर आते हैं। ये पशु यहां के पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं।
राजस्थान से आने वाले पशुओं को रोकने की व्यवस्था नहीं
याचिका में कहा है कि नगर निगम ने पशुओं को शहर से बाहर किया था, लेकिन राजस्थान से आने वाले पशुओं की वजह से अब दोबारा शहर की सड़कों पर पशु नजर आने लगे हैं। राजस्थान की ओर से आने वाले पशुओं को रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। इसके चलते पौधे नष्ट हो रहे हैं। सोमवार को हाई कोर्ट को इस मामले में बहस सुनना थी जो अब अगस्त के दूसरे सप्ताह में होगी।
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