18 महीने से कम समय में ‘मेड इन इंडिया’ ऐप Koo ने पार किया 1 करोड़ यूजर्स का आंकड़ा

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नई दिल्ली। भारत के मल्टी-लैंग्वेज माइक्रो-ब्लॉगिंग ऐप Koo ने मार्च 2020 में लॉन्च होने के बाद से भारी वृद्धि दर्ज करते हुए, 1 करोड़ (10 मिलियन) डाउनलोड को पार कर लिया है। प्लेटफॉर्म पर अब सभी क्षेत्रों के लोग हैं – जिनमें कुछ प्रमुख चेहरे भी शामिल हैं। जैसे फिल्मी सितारे, राजनेता, खिलाड़ी, लेखक, पत्रकार – आठ भाषाओं में अपने अपडेट शेयर कर रहे हैं और अपने फॉलोवर्स के साथ प्रतिदिन जुड़ रहे हैं| फरवरी और अगस्त 2021 के बीच डाउनलोड काफी तेजी से बढ़ रहे हैं, कू ने 85 लाख उपयोगकर्ताओं (8.5 मिलियन) को कू ऐप डाउनलोड करते देखा।

Koo ने पार किए 1 करोड़ डाउनलोड

Koo के एक प्रवक्ता ने कहा, “Koo को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने के सपने के साथ शुरू किया गया था जहां लाखों भारतीय स्वतंत्र रूप से अपने विचारों को व्यक्त कर सकें और अपनी पसंदीदा भाषा में अपने विचार शेयर कर सकें। जब से हमने मार्च 2020 में लॉन्च किया है, प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही है। Koo ने अब तक 1 करोड़ डाउनलोड हासिल कर लिए हैं। हाल के दिनों में हमने जो अनुभव किया है, उसकी तुलना में भविष्य में हमारी वृद्धि और भी तेज गति से होगी। हम अपने देश में बनी डिजिटल कंपनियों के लिए वैश्विक स्तर पर जाने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए विनम्र और उत्साहित हैं क्योंकि भारत ‘आत्मनिर्भर डिजिटल इंडिया’ के सपने को साकार करने और टेक्नोलॉजी और भाषाओं के माध्यम से देश को एकजुट करने की इच्छा रखता है।”

8 भाषाओं में उपलब्ध है Koo ऐप

सीरियल इंटरप्रेन्योर अप्रमेय राधाकृष्ण और मयंक बिदावतका के विचारों से जन्मा, Koo ऐप अब हिंदी, कन्नड़, मराठी, तमिल, तेलुगु, असमिया, बांग्ला और अंग्रेजी सहित 8 भाषाओं में उपलब्ध है। भारत को पहले स्थान पर रखने के पॉइंट ऑफ व्यू के साथ निर्मित इस प्लेटफॉर्म  ने कई तकनीकी विशेषताएं पेश की हैं जो ज्यादा भारतीयों को ऑनलाइन बातचीत में शामिल होने में सक्षम बनाती हैं, जिससे उन्हें मंच के माध्यम से खुद को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने का अधिकार मिलता है। Koo एक ही भाषा में समान रुचियों वाले यूज़र्स को खोजने में मदद करके विभिन्न भाषा समुदायों के भीतर एक गहरा संबंध बनाने में सक्षम बनाता है। Koo भारत को पहले स्थान पर रख कर सोचने के लिए कमिटेड है और अगले कुछ महीनों में भारतीयों के लिए कई सुविधाएं जारी करेगा|

Koo पर मौजुद है भारत की कई बड़ी हस्तियां

Koo ने अपने मंच पर कई प्रमुख चेहरों को देखा है। जैसे प्रमुख अभिनेता;  अनुपम खेर, टाइगर श्रॉफ, कंगना रनौत ; जैसे प्रमुख मंत्री और राजनेता -नितिन गडकरी, कमलनाथ, अशोक गहलोत, योगी आदित्यनाथ, शिवराज सिंह चौहान, सुप्रिया सुले, पीयूष गोयल, अश्विनी वैष्णव, रविशंकर प्रसाद, संजय सिंह, YS जगन मोहन रेड्डी, बसवराज बोम्मई, एचडी कुमारस्वामी, भूपिंदर सिंह हुड्डा और चंद्रशेखर आजाद कुछ के नाम हैं ; मोहम्मद शमी, रिद्धिमान साहा, आकाश चोपड़ा, जवागल श्रीनाथ, साइना नेहवाल, अभिनव बिंद्रा, रवि कुमार दहिया, मैरी कॉम और कई अन्य जैसे खिलाड़ी।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MEITY), प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), रेल मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, माय गोव (MyGov), डिजिटल इंडिया, बी एस एन एल (BSNL), इंडिया पोस्ट, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) अब Koo पर उपस्थित हैं। 14 भारतीय राज्यों के मुख्यमंत्री, विभिन्न राजनीतिक दलों के राजनेता – क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दोनों – और मीडिया हाउस भी कू पर सक्रिय हैं। यह प्लेटफॉर्म अब सरकारी विभागों और अन्य लोगों की मेजबानी कर रहा है, जो इसका इस्तेमाल भारतीय भाषाओं में लोगों के साथ विकास और अपडेट शेयर करने के लिए करते हैं।

ऐप सक्रिय बातचीत की सुविधा देता है क्योंकि क्रियेटर खुद को व्यक्त कर सकते हैं और यूज़र्स कस्टमाइज फ़ीड बनाने के लिए अपनी पसंद के क्रियेटर्स को फॉलो कर सकते हैं। यह अपनी तरह का अनूठा, भारत का पहला बहुभाषी मंच है। भारत सरकार द्वारा आयोजित 2020 में आत्मानिर्भर ऐप (Aatmanirbhar Bharat App) इनोवेशन चैलेंज जीतने के बाद, ऐप को सभी से सराहना मिली है। इसे 2020 के लिए गूगल प्लेस्टोर (Google Play Store) का सर्वश्रेष्ठ दैनिक आवश्यक ऐप भी नामित किया गया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने अपने मन की बात संबोधन में इसका विशेष उल्लेख किया था।

Koo ऐप गुजराती और पंजाबी में उपलब्ध होगा

Koo ऐप को जल्द ही गुजराती और पंजाबी में उपलब्ध कराया जाएगा। वर्तमान में, Koo ऐप 8 भाषाओं – हिंदी, कन्नड़, मराठी, तमिल, तेलुगु, असमिया, बांग्ला और अंग्रेजी में उपलब्ध है। कू ऐप नाइजीरिया में उपलब्ध है और दुनिया भर के अन्य देशों में विस्तार करने के लिए उत्साहित है। विस्तार उन क्षेत्रों को प्राथमिकता देगा जहां अंग्रेजी के अलावा, अन्य भाषाएं दिन-प्रतिदिन की बातचीत का हिस्सा बनती हैं।