मशीन से सड़कों की सफाई, लेकिन दिल और मन की सफाई कैसे

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रायपुर: चिंतकजी बेहद खुश हैं कि राजधानी की सड़कें मशीन से साफ होने लगीं। उन्होंने निंदकजी से कहा, ‘हमें गर्व है कि मुख्यमंत्री के जन्मदिन पर महानगरीय सुविधा मिल गई।” यह सुनकर निंदकजी बोले, ‘मुख्यमंत्री ने बहुत कुछ साफ करने का संकेत दिया है। यह तो भविष्य ही बताएगा कि कितनी धूल साफ हुई और वायु की गुणवत्ता सुधरी। काश, दिल और मन साफ करने की भी कोई मशीन आ जाती, क्योंकि अंदर की बुराइयों का सफाया होना जरूरी है। लोग सड़कों पर गंदगी फैलाने से बाज नहीं आते। बरसात में कई सड़कें उधड़ी हुई हैं। कीचड़ सूख जाता है, तो धूल उड़ने लगती है। सड़कें पुख्ता नहीं बनतीं, क्योंकि उनमें गुणवत्तायुक्त सामग्री का उपयोग नहीं होता। मशीन बेचारी तंग आ जाएगी हमारी करतूतों से।” निंदकजी का कहना ठीक है। मशीन तो अपना काम करेगी ही, हम मनुष्य हैं। मशीन के भरोसे ही मत बैठे रहें।

चालीसा पढ़ते रहिए

आटो चालकों पर चाहे जितना लिखा जाए, वह कम ही होगा। कई बार उनकी करतूतों के कारण जान संकट में पड़ी है। लिखने लगूं तो एक उपन्यास तैयार हो जाएगा। सड़क पर चलिए तो मन-ही-मन हनुमान चालीसा का पाठ करते रहिए। आटो देखकर ही मन में डर समा जाता है। सोचिए, आटो कितना सुविधाजनक वाहन है। यह सीधे हमारे दरवाजे पर आकर खड़ा होता है, जबकि अन्य वाहन सड़क पर ही उतार देते हैं। लेकिन यह सुविधा कुछ ऐसे लोगों के हाथ में चली गई, जिनका मकसद सिर्फ कमाई करना है। उनकी लापरवाही इतनी बढ़ गई कि इस काम में लगे अच्छे लोग भी बदनाम हो गए। कमाना बुरा नहीं है, लेकिन कुछ जिम्मेदारी भी होती है। सड़क पर जाम लगाना, किसी को भी कुचल देना घोर निंदनीय है। उनकी नाक में नकेल डालना बहुत जरूरी है। कलेक्टर ने बैठक ली है। देखिए क्या सुधार होता है।

मालिश कराने वाले मास्टर साहब

सूरजपुर जिले की एक प्राथमिक शाला के शिक्षक को छात्रा से मालिश कराने के आरोप में निलंबित कर दिया गया। भला हो जागरूक ग्रामीणों का, जिन्होंने वीडियो बनाकर वायरल कर दिया, वरना मास्टर साहब की हरकतें बढ़ती ही जातीं और वे कुछ और कर बैठते। निलंबन की सजा कम है। ऐसे शिक्षक को तो बर्खास्त करके पुलिस के हवाले कर देना चाहिए। शिक्षक का काम शिक्षा और संस्कार देना है। गरीब अभिभावक सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाते हैं। ऐसे शिक्षक रहे तो गरीबों का सपना कैसे साकार होगा? कैसे उनके बच्चे अपना भविष्य संवार पाएंगे? राज्य के सरकारी स्कूलों की हालत खराब है। यह हालत इसलिए है, क्योंकि उच्चाधिकारी निरीक्षण नहीं करते। शिक्षा विभाग के अफसर स्कूलों में जाते रहें तो अनुशासन बना रहेगा। बीच-बीच में कलेक्टर और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को स्कूलों का निरीक्षण करना चाहिए। सख्ती के बिना सुधार नहीं होगा

न सुधरने की कसम खाई है

कोरोना-डेंगू का कहर जारी है। लापरवाही भारी पड़ सकती है। कोरोना को लेकर जागरूकता कम होती जा रही है। किसी चौराहे पर खड़े होकर आते-जाते हुए लोगों को देखिए, बहुत-से लोग मुखड़ा खोले हुए नजर आएंगे। अब उनके लिए मास्क जरूरी नहीं रह गया है। शारीरिक दूरी के नियम का पालन जब कोरोना की विकराल स्थिति के दौरान नहीं हुआ तो अब क्या होगा? इसी तरह डेंगू से भी बचने के उपाय नहीं किए जा रहे हैं। नगर निगम की टीम घर-घर जाकर कूलर आदि की सफाई करा रही है और सावधानी बरतने का आग्रह कर रही है। महापौर खुद मोर्चा संभाले हुए हैं। वे अपने आगे सफाई कराते हैं, ताकि डेंगू से किसी की जान न जाने पाए, लेकिन बहुत से लोगों को यह नागवार गुजर रहा है। यानी यूं कहिए कि कुछ लोगों ने तो न सुधरने की कसम खा रखी है।