अच्छे रहे 75, स्वर्णिम होंगे अगले 5 साल : जानें- कैसे हवाई जहाज में उड़ेंगे हवाई चप्पल वाले

Whatsapp

नई दिल्ली। हवाई चप्पल वाले करेंगे हवाई सफर। इन दिनों भारत की एविएशन इंडस्ट्री में यही नारा गूंज रहा है। यानी जोर यात्रियों की संख्या बढ़ाने और सस्ते टिकट पर है। जबकि 1912 में उड़ी पहली फ्लाइट से लेकर अभी कुछ समय पहले तक ऐसा माना जाता था कि भारत में हवाई जहाज में सफर तो सिर्फ अमीरों के लिए है। लेकिन अब आसमान की इस चिड़िया ने जमीन पर रहने वालों से रिश्ता बनाना शुरू कर दिया है। अर्थव्यवस्था के विकास, बढ़ते कारोबार और तेज रफ्तार जिंदगी के चलते आम लोगों के लिए भी हवाई सफर स्टेटस सिंबल नहीं बल्कि एक जरूरत बन गया है। तो आइए एविएशन इंडस्ट्री के चार दिग्गजों एयर इंडिया के पूर्व चेयरमैन रोहित नंदन, हैदराबाद एयरपोर्ट के सीईओ प्रदीप पनिकर, सिविल एविएशन के विशेषज्ञ हर्षवर्धन और दिल्ली एयरपोर्ट के सीईओ विदेह कुमार जयपुरियार के साथ पिछले 75 साल के सफर को देखते हैं और जानते हैं कि आने वाले पांच साल में फ्लाइट कैसे बेहतर होगी।

एयर इंडिया के पूर्व चेयरमैन रोहित नंदन के मुताबिक अगले पांच सालों में सिविल एविएशन सेक्टर प्रमुख रूप से दो फैक्टर्स के चारों ओर डेवलप करेगा। पहला फैक्टर है कोरोना पैनडेमिक और दूसरा एयर इंडिया का प्राइवेटाइजेशन। कोरोना के चलते पिछले एक साल से ज्यादा समय से एविएशन सेक्टर में कई तरह के प्रतिबंध लगे हैं। इन प्रतिबंधों के हटते ही बड़े पैमाने पर लोग अपने घरों से निकलें और टूरिज्म तेजी से बढ़ेगा। अचानक से बहुत अधिक मांग बढ़ना एविएशन इंडस्ट्री के लिए भी बड़ी चुनौती होगी। अगर मांग और सप्लाई में संतुलन नहीं बनाया जा सका तो काफी मुश्किल होगी। फ्लाइट की टिकट काफी महंगी हो जाएगी। इस चुनौती को देखते हुए एविएशन कंपनियों को अभी से तैयारी करनी होगी।

हैदराबाद एयरपोर्ट के सीईओ जीएमआर प्रदीप पनिकर के मुताबिक पिछले तीन सालों में सिविल एविएशन इंडस्ट्री भारत की सबसे तेजी से बढ़ने वाली इंडस्ट्री थी। जैसे ही दुनिया कोविड से रिकवर करेगी भारत की सिविल एविएशन इंडस्ट्री फिर से तेजी पकड़ेगी और 2024 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी सिविल एविएशन मार्केट बन जाएगी।

सिविल एविएशन के विशेषज्ञ हर्षवर्धन बताते हैं कि अभी हम हम विश्व के पांचवें या छठे स्तर के एविएशन मार्केट हैं। अब तो भारत कई विश्व स्तरीय एयरपोर्ट बना रहा है। इस इंडस्ट्री की प्रगति में विदेश में रहने वाले भारतीयों का बड़ा योगदान है क्योंकि वे बहुत यात्रा करते हैं। अगले पांच साल में जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था बढ़ेगी उसके साथ एविएशन बढेगा। आने वाले सालों में भी एविएशन में ग्रोथ बनी रहेगी।

अगले पांच साल में 6 चीजें होंगी

1. 25 से 30 नए एयरपोर्ट

दिल्ली एयरपोर्ट के सीईओ विदेह कुमार जयपुरियार बताते हैं कि अगले पांच साल में देश में 25 से 30 नए एयरपोर्ट शुरू हो जाएंगे। आज हमारे एयरपोर्ट दुनिया के कई बड़े देशों के एयरपोर्ट के बराबर सुविधा दे रहा है। आज यूएस और चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा डोमेस्टिक एविएशन सेक्टर है। अगले पांच साल में एविएशन सेक्टर नई ऊंचाइयों को छूएगा। हम आजादी के 75 वें साल में प्रयास कर रहे हैं कि दिल्ली एयरपोर्ट से 75 डेस्टिनेशन्स के लिए फ्लाइट की सुविधा दे सकें। अभी दिल्ली एयरपोर्ट से 67 डेस्टिनेशन्स के लिए फ्लाइट चलाई जा रही है।

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की योजना देशभर में 2024 तक 100 हवाईअड्डे, जलीय हवाईअड्डे और हेलीपोर्ट बनाने की है। इनका डेवलपमेंट क्षेत्रीय हवाई संपर्क ‘उड़ान’ योजना के तहत होगा। ऑप्रेशनल हवाईअड्डों की संख्या जो आज करीब 150 है इसे 2040 तक 200 तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्राइवेट सेक्टर की मदद से हवाईअड्डों को डेवलप किया जा रहा है। इसमें दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, हैदराबाद, अहमदाबाद सहित हवाईअड्डे हैं।

2. तेजी से बढ़ेगी विमानों की संख्या

बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए देश में हवाई जहाजों की संख्या को 2026 तक एक हजार तक बढ़ाने की जरूरत होगी। अभी देश में हवाई जहाजों की संख्या लगभग 700 है। 2036 तक एयरक्राफ्ट की संख्या को 2000 तक बढ़ाना होगा। मांग को ध्यान में रखते हुए देश की ज्यादातर विमानन कंपनियों ने नए विमानों के लिए ऑर्डर भी दे दिए हैं।

3. सस्ता होगा सफर

उड़ान योजना का मकसद क्षेत्रीय हवाई रूटों पर ग्राहकों को सस्ती विमान सेवा उपलब्ध कराना, साथ ही विमानन कंपनियों के लिए इसे आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाए रखना है। आम आदमी महज 2500 रुपये में हवाई जहाज का टिकट बुक करा सकता है। इस योजना के तहत देश रूटों पर शुरू की जाने वाली फ्लाइटों में यात्रियों को सस्ती टिकट मिल सकेगी।

5. 2036 तक सालाना 47 करोड़ होगी यात्रियों की संख्या

भारतीय सिविल एविएशन इंडस्ट्री दुनिया में सबसे तेजी से ग्रोथ कर रही इंडस्ट्री बन चुकी है। भारत में साल 2036 तक देश के एविएशन एक्टर में हवाई यात्रियों की संख्या बढ़कर 47 करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है। साल 2025 तक भारत दुनियाभर में तीसरा सबसे बड़ा एविएशन सेक्टर बनने की राह पर है। आईएटीए के मुताबिक साल 2017 तक भारत लगातार तीन सालों तक दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाले एविएशन एक्स्टर का खिताब जीत चुका है।

6. एयर कार्गो का कारोबार भी बढ़ेगा

नए एयरपोर्ट और विमानों की संख्या के साथ देश में एयर कार्गो का कारोबार भी तेजी से बढ़ेगा। विमानों के जरिए देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जल्द से जल्द सामान पहुंचाया जा सकेगा। इससे जहां देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी वहीं मेडिकल और कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत मिलेगी। किसानों के लिए भी बड़े बाजारों तक पहुंचना आसान हो जाएगा।

देश की एविएशन इंडस्ट्री में निवेश बढ़ने, नए एयरपोर्ट बनने और नए नए विमान आने से युवाओं को इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार भी मिलेगा। ट्रंड पायलट, ग्राउंड स्टॉफ, केबिन क्रू सहित कई तरह के प्रशिक्षित स्टॉफ की बड़े पैमाने पर जरूरत होगी।

भारत में एविएशन इंडस्ट्री के 6 बड़े पड़ाव

1. टाटा एयरलाइंस हो गई एयर इंडिया

भारत में एविएशन इंडस्ट्री की शुरुआत 1912 में हुई जब पहली फ्लाइट करांची से दिल्ली पहुंची। ये सर्विस इम्पीरियल एयरवेज यूके की मदद से इंडियन स्टेट एयर सर्विस ने शुरू की थी। पर देश में एविएशन इंडस्ट्री के विकास के लिए असल मायने में 1932 में काम शुरू हुआ जब जेआरडी टाटा ने टाटा एयरलाइन को शुरू किया। आजादी के बाद टाटा एयरलाइंस का नाम बदल कर एयर इंडिया हो गई।

2. 1948 में पहली इंटरनेशनल फ्लाइट मालाबार प्रिंसेस

दिल्ली एयरपोर्ट के CEO विदेह कुमार जयपुरियार ने बताया कि देश में सिविल एविएशन के लिए 8 जून 1948 काफी महत्वपूर्ण तारीख थी। इसी दिन देश की पहली इंटरनेशनल फ्लाइट मालाबार प्रिंसेज मुंबई से लंदन के लिए रवाना हुआ था। ये हमारी पहली अंतरराष्ट्रीय सेवा था।

सिविल एविएशन के विशेषज्ञ हर्षवर्धन बताते हैं कि सबसे पहले हिन्दुस्तान ने अपनी पकड़ी बनाई तो वह सिविल एविएशन था। 1948 में ही हमारी फ्लाइट लंदन जाने लगी। बहुत जल्द ही हम सारे देश में फैल गया। इससे हमारा डिप्लोमैटिक रोल बढ़ा किया। एयर इंडिया पहला ऐसा स्थान था जिसने सबसे पहले भारत ने दुनिया को अपनी उत्कृष्टता दिखाई। हम लोगों ने सबसे पहले 707 जहाज लांच करने वाले सबसे पहले देशों में रहे हैं। हिन्दुस्तान की एयरलाइंस टेक्नोलॉजी, टेक्निकल स्किल और ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर में हमेशा आगे रहे।

3. 1953 में एयरलाइंस को नेशनलाइज किया गया

विदेह कुमार जयपुरियार के मुताबिक दूसरा सबसे बड़ा डेवलपमेंट 1953 में हुआ। इस साल सभी एयरलाइंस को नेशनलाइज कर दिया गया। इसके बाद देश में दो ही एयरलाइंस बचीं एक इंडियन एयरलाइंस जो घरेलू सेवा के लिए थी और एयर इंडिया अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए। उस समय दुनिया भर से लोग भारत सिर्फ ये समझने आते थे कि इंडियन एयरलाइंस इतनी अच्छी सर्विस कैसे देती है।

4. 80 और 90 का दशक

1986 में पहली बार सरकार ने एविएशन सेक्टर में उदारीकरण की नीति अपनाई। इसके तहत प्राइवेट एयरलाइंस को एयर टैक्सी चलाने की अनुमति मिली। 1990 में भारत ओपेन स्काई पॉलिसी लेकर आया जिससे विदेशी कारगो कंपनियां को भी देश में आसान शर्तोँ के साथ आने जाने की अनुमति मिली। वहीं 1986 से 2003 तक बहुत सी प्राइवेट कंपनियों ने देश में इस सेक्टर में निवेश किया।

सिविल एविएशन के विशेषज्ञ हर्षवर्धन के मुताबिक 1980 में भारत दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक हो गया और इंडियन एयरलाइंस दुनिया की सबसे बड़ी डोमेस्टिक एयरलाइंस में से एक हो गई।

5. 21वीं सदी की शुरुआत में लो कॉस्ट कैरियर्स आए

2003 में पहली बार देश में लो कॉस्ट कैरियर्स की सेवा शुरू हुई। डेक्कन, स्पाइसजेट, गो एयर, जैसी कंपनियां भारतीय बाजार में आईं। कंपनियों को अपने किराए और शेड्यूल तय करने का अधिकार मिला। इससे सेवाएं बेहतर हुईँ। यह पहली बार था जब मध्यमवर्ग ने फ्लाइट से सफर करना अपने बजट के मुताबिक समझा।

6. 2010 के बाद का दौर, नेशनल सिविल एविएशन पॉलिसी और उड़ान स्कीम

मौजूदा सरकार ने सिविल एविएशन सेक्टर पर नए मुकाम ले जाने के लिए दो बड़ी योजनाओं का ऐलान किया है। इसमें पहली है नेशनल सिविल एविएशन पॉलिसी। इसे 2016 में शुरू किया गया। वहीं दूसरी क्षेत्रीय हवाई संपर्क स्कीम उड़ान स्कीम रही। इसे 2017 में शुरू किया गया। इस स्कीम का मकसद है कि देश की बढ़ती एविएशन इंडस्ट्री का फायदा आम आदमी को मिल सके और देश में ज्यादा से ज्यादा एयरपोर्ट डेवलप किए जा सकें। उड़ान स्कीम शुरू हुई तो देश में 75 एयरपोर्ट चल रहे थे। इस स्कीम के आने के बाद कई एयरपोर्ट तेजी से बढ़े हैं। वहीं पिछले कुछ सालों में सरकार ने एविएशन सेक्टर के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण नीतिगत कदम उठाए हैं। सरकार ने एयर ट्रांसपोर्ट सर्विस (Domestic Airlines) में एफडीआई की सीमा को 40 से बढ़ाकर 49 कर दिया। वहीं एनआरई के लिए ये सीमा 100 फीसदी तक कर दी। देश में पांच साल के अनुभव और 20 से अधिक एयरक्राफ्ट वाली कंपनियों को इंटरनेशनल फ्लाइट चलाने की अनुमति दे दी गई। इसका फायदा जेट एयरवेज और किंगफिशर जैसी कंपनियों को हुआ।