23 साल से चल रहा एक आंदोलन : विजय सिंह बोले- गलत हूं तो फांसी दे दो, सही हूं तो इंसाफ

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मुजफ्फरनगर। दुनिया का सबसे लंबा धरना होने का रिकॉर्ड बना चुके मास्टर विजय सिंह को न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। वर्ष 2012 में वह लखनऊ तक पैदल यात्रा कर तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिले थे। सीएम ने उच्चाधिकारियों की जांच कमेटी गठित की तो उन्हें उम्मीद की आस जगी, लेकिन जांच आज तक पूरी नहीं हो पाई। इंसाफ के लिए विधायक-सांसद के यहां भी दस्तक दी है। हालांकि, चौसाना की करीब 300 बीघा जमीन कब्जामुक्त हुई है, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।

वह इस मामले की सीबीआई जांच की मांग भी कर चुके हैं। मास्टर विजय सिह का कहना है कि गलत हूं तो फांसी दे दो, सही हूं तो इंसाफ क्यों नहीं दिया जा रहा है। शासन-प्रशासन की कुछ जांच में मास्टर विजय सिंह के आरोप सही पाए गए हैं। जिसके चलते 11 साल पहले 300 बीघा भूमि प्रशासन ने भूमाफियाओं के कब्जे से मुक्त कराई थी। 3200 बीघा भूमि पर जांच अब भी चल रही है। इस मामले में 100 से अधिक मुकदमे राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी के दर्ज हुए तथा 81 हजार रुपये का जुर्माना राजकोष में जमा हुआ है।

विभिन्न जांच में विरोधाभास भी सामने आए। भूमि घोटाले में अवैध कब्जा मुक्ति की कार्यवाही नहीं होने पर मास्टर विजय सिंह ने 30 मार्च 2012 को मुजफ्फरनगर से लखनऊ स्थित सीएम निवास तक पैदल यात्रा की। 28 अप्रैल 2012 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर सरकारी भूमि से अवैध कब्जा हटाने की मांग की, जिस पर सीएम ने जांच कमेटी बनाकर कार्रवाई के आदेश दिए थे। राजस्व परिषद के अफसरों की यह कमेटी अभी तक जांच पूरी नहीं कर पाई है।

धमकी मिली और लालच भी दिया गया

धमकी के साथ मिला प्रलोभन मास्टर विजय सिंह और उनके परिवार को कई बार जान से मारने की धमकी भी मिली। पूर्व में पुलिस-प्रशासन को उन्होंने लिखित में शिकायत भी की थी, जिसके चलते उन्हें सुरक्षा भी दी गई, लेकिन बाद में सुरक्षा को हटा लिया गया। आंदोलन जैसे-जैसे लंबा होता गया, परिजनों और रिश्तेदारों का साथ छूटता गया। विजय सिह का कहना है कि यदि प्रशासन सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटा ले तो प्रतिवर्ष प्रशासन को उक्त जमीन से करीब 50 लाख रुपये की आय होगी। उन्होंने बताया कि धमकी के साथ-साथ उन्हें प्रलोभन भी दिया गया।

देहदान कर चुके हैं विजय सिंह

मास्टर विजय सिंह ने वर्ष 2013 में दिल्ली एम्स को अपनी देह दान की थी, ताकि मौत के बाद किसी बीमार एवं पीड़ित व्यक्ति को उनके शरीर का कोई अंग काम आ सके। बीते दिनों आंखों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में गए थे, लेकिन नेत्र चिकित्सक ने उनका ठीक से उपचार नहीं किया था। इसको लेकर भी काफी बखेड़ा हुआ था।

23 साल से चल रहा आंदोलन

बुढ़ापे की दहलीज पर पहुंचे मास्टर विजय सिंह ने जब धरना शुरू किया था, तब उनकी आयु मात्र 34 साल थी। धरना देते हुए उन्हें 23 साल से अधिक का समय हो गया है। अब मास्टर विजय सिंह 57 साल के हो गए हैं। आंदोलन के चलते उनकी उम्र काफी अधिक लगती है।