हड़ताल पर गए ट्रांसपोर्टरों ने कहा- सरकार पार्किंग चार्ज लेती है लेकिन पार्किंग की सुविधा नहीं देती!

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नई दिल्ली. नए मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicles Act) में भारी-भरकम जुर्माने के खिलाफ आज यानी गुरुवार को यूनाइटेड फ्रंट ऑफ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (यूएफटीए) के नेतृत्व में हड़ताल चल रही है. इसकी वजह से दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों में छुट्टी करनी पड़ी है. माल ढुलाई ठप है. यूएफटीए (UFTA) के अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल का कहना है कि 2004 से लेकर 2019 तक करीब डेढ़ दशक में ट्रांसपोर्टरों (Transporter) ने पार्किंग चार्ज (Parking Charges) के रूप में सरकार को 12 हजार करोड़ से अधिक का राजस्व दिया है, लेकिन पार्किंग की सुविधा आज तक नहीं मिली. ट्रांसपोर्टर जुर्माने की रकम भर सकता है लेकिन पहले यातायात व्यवस्था के ढांचे को सरकार ठीक करे. मोटर व्हीकल एक्ट में बढ़ाई गई जुर्माने की रकम को कम किया जाए और थर्ड पार्टी बीमा ( Third Party Insurance) की रकम की कैपिंग को हटाया जाए.

आने-जाने वाले लोगों की बढ़ी परेशानी!

ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से दिल्ली-एनसीआर में ई-रिक्शा, ऑटो, आरटीवी, टैक्सी, ट्रक, बसें, मिनी बसें और स्कूल बसें बंद हैं. एसोसिएशन ने इससे करीब 23 हजार करोड़ का नुकसान होने का अनुमान लगाया है. लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सरकारी बसें चल रही हैं लेकिन उन बसों से उतरने के बाद जो लोग ऑटो लेकर अपने दफ्तर या कॉलेज तक जाते हैं उन्हें कोई साधन नहीं मिल रहा.

दिल्ली के कई निजी स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को मैसेज भेजकर सूचित किया कि स्कूलों में निजी तौर पर चलने वाली वैन या बसें चक्का जाम के कारण प्रभावित होंगी. स्कूल वैन और बसें बच्चों को उनके घर से लेने नहीं पहुंचीं. दिल्ली-एनसीआर में कमर्शियल वाहनों की हड़ताल के कारण दिल्ली-एनसीआर के लोगों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है.

विदेशों की नकल कर जुर्माना बढ़ा दिया लेकिन सुविधाएं नहीं दीं

सभरवाल का कहना है कि उनका संगठन नए एमवी एक्ट में जुर्माने की रकम कम करवाने के लिए सरकार से मांग कर रहा है लेकिन किसी ने उसे गंभीरता से नहीं लिया. सरकार ने विदेशों की नकल कर के जुर्माना तो कई गुना बढ़ा दिया है लेकिन विदेशों की तर्ज पर ट्रांसपोर्टरों को दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में नहीं सोचा.

एक सितंबर से संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद से दिल्ली-एनसीआर सहित देश भर में इतने भारी-भरकम चालान काटे जा रहे हैं कि उसकी किसी ने उम्मीद नहीं की होगी. 15-20 हजार रुपये से शुरू हुआ चालान 6.5 लाख रुपये तक पहुंच गया है. बाइक का चालान एक लाख रुपये का काट दिया गया है. ट्रैक्टर का चालान 59 हजार रुपये का बना दिया गया. इसलिए ट्रांसपोर्टरों में सरकार के खिलाफ गुस्सा है. उनका कहना है कि पहले अमेरिका जैसी सुविधाएं दे दो, फिर वहां जितना जुर्माना भी लगा देना. जुर्माने के अलावा वाहन चालक पुलिस के गलत व्यवहार से भी खिन्न हैं.