Maha Shivratri 2021: महाशिवरात्रि पर 101 साल बाद शिव योग, सिद्धि योग और घनिष्ठ नक्षत्र का अद्भुत संयोग

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उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में शिवनवरात्रि उत्सव के आठवें दिन बुधवार को भगवान महाकाल का शिव तांडव रूप में श्रृंगार किया गया। संध्या पूजन के बाद भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया।

गुरुवार सुबह छह बजे से भगवान महाकाल के होंगे दर्शन

पुजारी महानिशाकाल में महाकाल की महापूजा करेंगे। गुरुवार सुबह छह बजे से शुक्रवार सुबह 10 बजे तक सतत 28 घंटे भक्तों को भगवान महाकाल के दर्शन होंगे। इस दौरान गर्भगृह में पूजा-अर्चना का क्रम जारी रहेगा। नंदी हाल में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा

शीघ्र दर्शन पास की ऑनलाइन बुकिंग

दर्शन के लिए अग्रिम बुकिंग के आधार पर भीतर प्रवेश दिया जाएगा। 250 रुपये के शीघ्र दर्शन पास के लिए पार्किंग स्थलों पर काउंटर स्थापित किए गए हैं। शीघ्र दर्शन पास की ऑनलाइन बुकिंग भी की जा सकती है। इसके लिए मंदिर की वेबसाइट पर जाकर भुगतान कर पास प्राप्त किया जा सकता है।

महाशिवरात्रि पर 101 साल बाद अद्भुत संयोग

महाशिवरात्रि भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे अच्छा दिन है। इस दिन भोलेनाथ के उपासक उनकी पूजा-अर्चना से मनोवांछित फलों की प्राप्ति कर सकते हैं। हालांकि, ये शिव पर्व इस साल और भी ज्यादा खास होने जा रहा है। महाशिवरात्रि का पर्व 11 मार्च को है और ज्योतिषविदों के मुताबिक, 101 साल बाद इस त्योहार पर एक विशेष संयोग बनने जा रहा है। ज्योतिषियों का कहना है कि महाशिवरात्रि के दिन शिवयोग, सिद्धियोग और घनिष्ठा नक्षत्र का संयोग आने से त्योहार का महत्व और ज्यादा बढ़ गया है। इन शुभ संयोगों के बीच महाशिवरात्रि पर पूजा बेहद कल्याणकारी मानी जा रही है।

शिव योग, सिद्धि योग और घनिष्ठ नक्षत्र का संयोग

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। 11 मार्च गुरुवार को त्रयोदशी और चतुर्दशी मिल रही हैं। इस दिन शिव योग, सिद्धि योग और घनिष्ठ नक्षत्र का संयोग बन रहा है। महाशिवरात्रि पर ऐसी घटना 101 साल बाद होने जा रही है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह इसी दिन हुआ था।