MP Vidhan Sabha: मंत्री का था दावा, विधानसभा उपाध्यक्ष बनाकर खुश करने की कोशिश

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जबलपुर। मंत्री के लिए आवाज उठा रहे जबलपुर को संभवत: विधानसभा उपाध्यक्ष से ही खुश होना पड़ सकता है। फिलहाल शिवराज मंत्री मंडल में यहां से किसी को शामिल नहीं किया गया। ऐसे में मंत्री की दौड़ में सबसे पहले चर्चा में आई ​सिहोरा विधायक नंदनी मरावी को संगठन विधानसभा उपाध्यक्ष की जवाबदेही दे सकता है। अभी संगठन की तरफ से इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है।

क्यों नंदनी को कमान: जबलपुर में वरिष्ठता के क्रम में अव्वल भाजपा के पाटन विधानसभा क्षेत्र के विधायक अजय विश्नोई हैं। उनके बाद मौजूदा विधायक में सिहोरा विधानसभा क्षेत्र की नंदनी मरावी हैं। उनका ये तीसरा कार्यकाल है। शिवराज मंत्री मंडल के पहले गठन के बाद सिहोरा​ विधायक का नाम मंत्री मंडल की सूची में होने की खबर थी। ये बात कई नेताओं ने बातचीत में भी स्वीकार्य की थी लेकिन रातोंरात सूची में बदलाव हुआ और आदिवासी कोटे से किसी और को जवाबदेही मिली।

जबलपुर के कई नेता मंत्री बनने के लिए प्रयासरत है। इसमें पाटन विधायक अजय विश्नोई ने कई बार खींज में इंटरनेट मीडिया के माध्यम से बयान देकर अपनी नाराजगी भी जाहिर कर चुके हैं। मंत्री मंडल के लिए उनका दावा सबसे ज्यादा मजबूत था लेकिन पार्टी और संगठन ने उन्हें तवज्जों नहीं दी। जिसके बाद जबलपुर की लगातार उपेक्षा का आरोप लगने लगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को खुद जबलपुर आकर ये कहना पड़ा कि वो खुद जबलपुर के विकास में किसी तरह की कमी नहीं रहने देंगे। उन्होंने विकासकार्यो का ब्लू प्रिंट जनप्रतिनिधियों के साथ तैयार करवाया।

– कांग्रेस सरकार के वक्त जबलपुर से दो कैबिनेट मंत्री थे। महाकोशल को उस वक्त सबसे ज्यादा तवज्जों सरकार में मिली। मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के अलावा तीन मंत्री मिले। ऐसे में भाजपा विधानसभा उपाध्यक्ष के लिए नंदनी मरावी को चुनकर महिला आदिवासी चेहरे को तवज्जों देने का प्रयास करेगी। बता दें कि कांग्रेस विधायक हिना कावरे भी विस उपाध्यक्ष थी उन्हीं के जबाव में पार्टी नंदनी मरावी को ये जवाबदारी दे सकती है। अजय विश्नोई के बाद नंदनी मरावी वरिष्ठ विधायक है इसलिए उनका दावा मजबूत है।

— नंदनी मरावी का संगठन और सरकार के साथ तालमेल उम्दा रहा है। उनका विवादों से कोई नाता नहीं। छवि बेहतर होने का लाभ भी मिलेगा।

कार्यकाल-

1984 में आदिवासी विकास परिषद की सदस्य बनी।

1994 और 1999 में सरपंच निर्वाचित हुई।

1997—98 में श्रेष्ठ कार्य के लिए प्रथम पुरस्कार मिला।

2000—2005 तक डिंडौरी मंडी की अध्यक्ष।

2008 में विधानसभा चुनाव लड़ा और सदस्य निर्वाचित।

2013 के विधानसभा चुनाव में सिहोरा से दूसरी दफा निर्वाचित।

2018 के विधानसभा चुनाव में सिहोरा से तीसरी दफा निर्वाचित।