समाचार पत्रों के प्रकाशन पर प्रशासन की मौन स्वीकृति?

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विधायक मुनमुन के प्रश्नों की अनदेखी
राष्ट्रचंडिका सिवनी। इन दिनों सिवनी में एक समाचार पत्र जो कथित तौर पर दैनिक रूप से प्रकाशित होने का दावा कर एक नहीं बल्कि दो-दो आर एन आई नंबर के साथ मात्र 15 अगस्त एवं 26 जनवरी को प्रकाशित होकर केवल और केवल विज्ञापनों की भूख मिटाता है। यह समाचार पत्र अपने प्रकाशन के दावे के अनुसार डी ब्लॉक हो चुका है एक महज पंपलेट बनकर रह गया है पर यह पत्रकारिता से इतर सेवाएं ले रहा है। नियम विरुद्ध यह इसलिए है कि हम नहीं कह रहे हैं बल्कि  जिला जनसंपर्क और उसके साथ की मापदंड कह रहे हैं। पिछले अंकों में हमने “वर्चुअल- संपर्क”( यह करोना कॉल का एक संपर्क माध्यम है) के आधार पर जानकारी दी थी कि जिला जनसंपर्क अधिकारी का कार्य क्षेत्र महज “को-ऑर्डिनेशन” है इस बात की यानी समाचार पत्रों की जिम्मेदारी अर्थात क्या और कौन किस दिशा में प्रकाशित कर रहा है इसकी जिम्मेदारी तो पी आर ओ कार्यालय को ही होनी चाहिए। यहां पर जिला जनसंपर्क ने अपना पल्ला यह कहकर झाड़ लिया कि उनका कार्य मात्र समन्वय मतलब को को-ऑर्डिनेशन है । आर एन आई ओ रजिस्ट्रेशन का मामला अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) का है, वही इसके जिम्मेदार होते हैं लिहाजा इन नियमों के मकडज़ाल में उलझ कर या उलझा कर ऐसे समाचार पत्रों का दावा करने वाले पंपलेट प्रकाशित हो रहे हैं। संबंधित प्रशासन मौन साधे  बैठा है। बात की जा रही है शिवनी से प्रकाशित एक कथित समाचार पत्र “दैनिक शिवनी चंडिका” की जो इस दायरे में आता है।
अब बात की जाए समाचार पत्रों के वैधानिक प्रकाशन की नियम और शर्तों की। इसके लिए बकायदा भारतीय समाचार पत्रों के रजिस्टार यानी आर एन आई जिम्मेदार होता है। इसके लिए देश की राजधानी दिल्ली में एक बहुत बड़ा कार्यालय है। यह देश के कोने कोने से प्रकाशित हो रहे समाचार पत्रों का उपयोग रखता है और वह है इन्हें टाइटल और मास्ट- हेड प्रदान करता है जिला स्तर पर किसी भी समाचार पत्र के पंजीयन की जिम्मेदारी और प्रकाशन के लिए जिला अधिकारी राजस्व अति जिला अधिकारी राजस्व और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व जिम्मेदार होते हैं इनके कार्य की इस संबंध में बात की जाए तो यह समाचार पत्रों के टाइटल और घोषणा पत्रों के परीक्षण के अधिकारी होते हैं इन्हीं के द्वारा जानकारियां भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक नई दिल्ली को भेजें जाना निश्चित किया गया है कौन सा समाचार पत्र नियमों के अनुसार प्रकाशित हो रहा है ,और कौन सा नियम विरुद्ध पंपलेट की श्रेणी का है ? पर यह सारी प्रक्रिया नदारद है सिवनी में।
उल्लेखनीय होगा कि मध्यप्रदेश  विधानसभा सत्र के दौरान वर्ष 2019 में विधायक दिनेश राय मुनमुन ने प्रश्नकाल के दौरान समाचार पत्रों के संबंध में प्रश्न उठाया गया था। इस पर तत्कालीन शासन ने समाचार पत्रों के मुद्रणालय और प्रकाशकों पर ताबड़तोड़ कार्यवाही की थी। नतीजा सामने भी आया था । अनेक समाचार पत्र संदेह के घेरे में आ गए थे। अभी अधिक समय नहीं गुजरा है जब ऐसे तत्व और घटनाएं फिर सामने आने लगी है आखिर कर जिम्मेदार प्रशासन के अधिकारी कर क्या रहे हैं, जनप्रतिनिधि भी क्यों चुप बैठे हैं।