एनआरसी में न शामिल किए जाने वाले जरूरतमंदों को कानूनी मदद देगी असम सरकार

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नई दिल्ली: असम में तीन दिन बाद यानी 31 अगस्त को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को प्रकाशित किया जाना है। अंतिम सूची में जिन जरूरतमंद लोगों का नाम शामिल नहीं होगा, उन्हें सरकार मुफ्त में कानूनी मदद मुहैया कराएगी।

असम के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह एवं राजनीतिक विभाग) कुमार संजय कृष्णा ने मंगलवार को कहा कि एनआरसी की सूची में जिनका नाम शामिल नहीं होगा। उन्हें तभी हिरासत में लिया जाएगा जब विदेशी न्यायाधिकरण (एफटी) उन्हें विदेशी नागरिक घोषित करेगी। इसके अलावा राज्य सरकार एनआरसी सूची में शामिल होने से वंचित लोगों को कानूनी सहायता मुहैया कराने के लिए भी सभी कदम उठाएगी। इन्हें कानून सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के जरिए सभी जरूरी सहायता मुहैया कराई जाएगी।

विदेशी अधिनियम, 1946 और विदेशी (न्यायाधिकरण) आदेश, 1964 के प्रावधानों के मुताबिक, सिर्फ विदेश न्यायाधिकरण के पास ही किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित करने का अधिकार है।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि संबंधित विदेशी न्यायाधिकरणों में जो अपील दायर की गई हैं, उनकी सुनवाई के लिए जल्द ही 200 विदेशी न्यायाधिकरण स्थापित किए जाएंगे। इसकी अधिसूचना राज्य सरकार जल्द ही जारी करेगी। 31 अगस्त से पहले एनआरसी राज्य में 1951 में प्रकाशित हुआ था।

जून में प्रकाशित सूची में करीब एक लाख लोगों का नाम शामिल नहीं था। उच्चतम न्यायालय की निगरानी में चल रही एनआरसी प्रक्रिया का लक्ष्य अवैध आव्रजकों की पहचान करना है।