नजरियाः कश्मीर पर अपने बयानों से पाकिस्तान के पोस्टर ब्वाय बने राहुल गांधी डैमेज कंट्रोल में जुटे

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भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर में धारा-370 खत्म करने के बाद से ही पाकिस्तान हर अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर यह मुद्दा उठा रहा है। ताकि वह भारत पर कश्मीर को लेकर दबाव बना सके। लेकिन पाकिस्तान की यह चाल उसके लिए उल्टी साबित हो गई। चीन और तुर्की के अलावा उसे किसी का साथ नहीं मिला। यहां तक की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश को संबोधित करते हुए सांकेतिक रूप से भारत को परमाणु हमले की गीदड़ भभकी दी। उसकी इस खोखली धमकी पर किसी भी देश ने कोई तवज्जों नहीं दी। इन सब हथकंड़ों के विफल होने से बौखलाए पाकिस्तान ने यूएन में कश्मीर मामले पर एक याचिका दी है। इस याचिका में भारत की प्रमुख और सबसे पुरानी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके राहुल गांधी के पूर्व के बयानों का हवाला देते हुए कश्मीर में हिंसा और हालात को बेहद गंभीर बताया गया है।

कांग्रेस को जैसे ही याचिका की भनक लगी, वह तुरंत कश्मीर पर दिए अपने पुराने बयानों को लेकर डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। क्योंकि जाहिर सी बात है कि उसकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पार्टी भाजपा इसे मुद्दा बनाने से चुकेगी नहीं और इसका लाभ वह आगामी महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा विधानसभा में उठाने के लिए करेगी। जम्मू-कश्मीर पर अपने बयानों के चलते पाकिस्तान के पोस्टर ब्वाय बने राहुल गांधी ने बुधवार को डैमेज कंट्रोल के लिए 2 ट्वीट किए।

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उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार से कई मुद्दों पर मैं असहमत हो सकता हूं। लेकिन में यह साफ कर देना चाहता हूं कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। इसमें पाकिस्तान या अन्य किसी तीसरे मुल्क के हस्तक्षेप करने की कोई जगह नहीं है”। इस संबंध में उन्होंने एक और ट्वीट किया। इसमें पाकिस्तान को लताड़ते हुए उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर में हिंसा है। पाकिस्तान द्वारा इसे भड़काया और समर्थन दिया जा रहा है। पाकिस्तान को दुनिया भर में आतंकवाद के प्रमुख समर्थक के तौर जाना जाता है”।

अनुच्छेद 370 हटने पर जहां देश भर में जश्न का माहौल था। वहीं कांग्रेस ने केंद्र सरकार के इस कदम की आलोना की थी। इस मुद्दे पर वह जनता के मूड को भांपने में विफल रही। हालांकि कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने धारा-370 हटने का स्वागत किया। इसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिपेंद्र हुड्डा और भूपेंद्र हुड्डा जैसे कई दिग्गज नेता शामिल थे। केंद्र के इस कदम को जनता से मिलते भारी समर्थन के बाद कांग्रेस ने अपने रूख में बस इतना बदलाव किया कि वह धारा-370 हटाने की प्रक्रिया को लेकर सरकार से सवाल कर रहे हैं। लेकिन तब तक तीर कमान से निकल चुका था। कांग्रेस के समर्थक ही इस मामले में पार्टी की आलोचना करने लगे।

पाकिस्तान का अब राहुल के बयानों का हवाला देते हुए यूएन में याचिका देना, उन्हें घरेलू राजनीति में बहुत भारी पड़ने वाला है। संभव है कि इसका असर आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को भुगतना पड़े। हरियाणा में तो पहले से ही कांग्रेस की प्रदेश ईकाई बिखरी हुई है।