जानलेवा काला ज्वर के ईलाज में अब गोली भी असरदार होगी, IIT हैदराबाद ने विकसित की टैबलेट

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नई दिल्ली। काला ज्वर (बुखार) जैसी जानलेवा बीमारी से पीड़ितों के लिए एक अच्छी खबर है। आइआइटी हैदराबाद ने उनके लिए एक ऐसा टैबलेट विकसित किया है जो शरीर में नियंत्रित तरीके से घुलती है। साथ ही शरीर को बगैर किसी तरह का नुकसान पहुंचाए तय समय से पहले पीड़ित को उससे पूरी तरह से निजात दिलाने में सक्षम है।

यह इसलिए भी खास है, क्योंकि अब तक इस बीमारी से निपटने के लिए कोई टैबलेट नहीं है। पीड़ित को अभी इसके इलाज के लिए कम से कम 45 दिनों तक लगातार इंजेक्शन लेना पड़ता है। जो महंगा और तकलीफ है।

यह एक बड़ी उपलब्धि इसलिए भी है, क्योंकि यह बीमारी सबसे ज्यादा उन्ही इलाकों में होती है, जहां गरीबी ज्यादा है। फिलहाल देश में काला ज्वर से सबसे ज्यादा प्रभावित जो राज्य है, उनमें बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक काला ज्वर से निपटने के लिए दवा तो मौजूद थी, लेकिन अब तक वह इंजेक्शन के रूप में ही मौजूद है। जो इससे ग्रसित व्यक्तियों को दिया जाता है। बावजूद इसके समय रहते पीड़ित लोंगों पर इसका समय से असर नहीं हो पाता था।

साथ ही यह पीड़ित व्यक्ति के शरीर में संतुलित मात्रा में न पहुंचने से जहर फैल जाता है। ऐसे में ज्यादातर लोगों की इलाज के दौरान ही मौत हो जाती थी। साथ ही यह काफी मंहगा भी था।

आइआइटी हैदराबाद के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिऐट प्रोफेसर डा चंद्रशेखर शर्मा के मुताबिक इस बीमारी में फंगल इंफेक्शन का भारी खतरा रहता है, ऐसे में यह पाया गया कि इनमें एक ऐसी टैबलेट ही ज्यादा कारगर होगी, तो नियंत्रित तरीके से शरीर के भीतर दवा की मात्रा को पहुचाएं। ऐसे में इस दिशा में काम शुरू किया गया।

इसके लिए नैनोफाइबर्स तकनीक का इस्तेमाल किया। दस दिन के भीतर वह पीडि़त व्यक्ति को उससे पूरी तरह से निजात भी दिला देगी। डॉ शर्मा के मुताबिक दवाओं के तैयार करने में इस्तेमाल की गई नैनोफाइबर एक अत्याधुनिक तकनीक है। जिसका इस्तेमाल अभी दुनिया भर में कम दवाओं के निर्माण में ही किया जा रहा है। फिलहाल इसे क्लीनिकल ट्रायल के बाद जल्द ही बाजार में उतारने की तैयारी है।