पंजाब के कुलदीप सिंह दिव्यांगों के लिए बने मिसाल, हजारों किलोमीटर ट्राइसाइकिल चलाकर पहुंचे इंदौर

इंदौर: देश में अमन-चैन का पैगाम लेकर पंजाब के लुधियाना जिले के रहने वाले 51 वर्षीय कुलदीप सिंह राठौड़ बुधवार को इंदौर पहुंचे। दिव्यांगों के लिए मिसाल बने कुलदीप सिंह दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद हजारों किलोमीटर ट्राइसाइकिल चलाकर इंदौर पहुंचे हैं। वे 10 अप्रैल को लुधियाना से चले थे और बुधवार को इंदौर पहुंचे। यहां पहुंचकर एलआईजी स्थित गुरुद्वारे में मत्था टेका और गुरुवार को औरंगाबाद स्थित नांदेड़ गुरुद्वारे के लिए रवाना हो गए।

दिव्यांगों के लिए उदाहरण बने कुलदीप मूल रूप से पटना के रहने वाले हैं और वर्षों से दिव्यांगों के अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि वे ऐसे लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देने के लिए हजारों किलोमीटर की यात्रा पर निकले हैं जो खुद को कमजोर समझते हैं। यात्रा के दौरान वे देशभर के पांच प्रमुख गुरुद्वारों में मत्था टेकेंगे। वे इसके पहले 18 राज्यों में घूमते हुए 40 हजार किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं।

बता दें कि, कुलदीप अपने पैरों पर खड़े रहने में असमर्थ हैं। वे ई-ट्राइसाइकिल से यात्रा कर रहे हैं। रास्ते में उन्होंने कहीं पेट्रोल पंप तो कहीं ढाबे पर रुककर अपनी गाड़ी की बैटरी चार्ज करते हुए यह यात्रा पूरी की। वे शाम को 6 बजे के बाद गुरुद्वारे या किसी भी सुरक्षित स्थान पर रुककर आराम करते हैं और फिर दिनभर गाड़ी चलाते हैं।

ट्यूशन पढ़ाकर बेटी को बनाया डॉक्टर
कुलदीप का कहना है कि दिव्यांगों के लिए प्रेरणा बनना उनके जीवन मकसद है। उन्होंने कई वर्षों तक ट्यूशन पढ़ाकर अपनी आजीविका चलाई और बेटी को डॉक्टर बनाया। बेटी पटना में प्रैक्टिस करती है। इंदौर आने के पहले कुलदीप लुधियाना से अनंतपुर साहेब, भटिंडा, हरियाणा, दिल्ली, मथुरा, आगरा, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, भोपाल होते हुए इंदौर पहुंचे। वे यहां से नांदेड़ होते हुए पटना में श्री गुरुगोविंदसिंह की जन्मस्थली पर जाएंगे।