हरियाणा और दिल्ली में बाढ़ का खतरा बढ़ा, हजारों लोगों को राहत केंद्रों में ले जाया गया

नई दिल्ली: हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से पिछले 40 वर्षों में सबसे अधिक आठ लाख से अधिक क्यूसेक पानी यमुना में छोड़े जाने के बाद दिल्ली और हरियाणा में नदी तट के आस-पास के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है। बुधवार सुबह दस बजे 206.60 मीटर के ऊपर पहुंच गई। यह खतरे के निशान से एक मीटर से अधिक है। हालांकि 40 साल बाद इतना पानी यमुना में छोड़ा गया है। लोगों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। कुछ रास्ते बंद कर दिए गए हैं, कई लोगों को टेंटों में शिफ्ट किया गया है। बाढ़ की आशंका को देखते हुए लोहे के पुलों पर सड़क और रेल यातायात पहले ही रोक दिया गया था। यमुना के किनारे रह रहे हजारों लोगों को निकालकर राहत केंद्रों में ले जाया गया है।

इस बीच देश के विभिन्न हिस्सों में हुई भारी बारिश और बादल फटने के कारण आई बाढ़ तथा भूस्खलन की घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 381 पहुंच गयी है जबकि 25 अन्य लापता हैं। हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से रविवार को 8.28 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है जिसके कारण दिल्ली में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। इस पानी को दिल्ली पहुंचने में 72 घंटे का समय लगने का अनुमान जताया गया था। आज जलस्तर 207 मीटर तक पहुंचने की आशंका है। दिल्ली में बाढ़ के खतरे का आकलन करने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने संबंधित विभागों के साथ सोमवार को बैठक कर इससे उत्पन्न होने वाली स्थिति पर विचार-विमर्श कर निपटने के निर्देश दिए थे।

अधिकारियों को हिदायत दी गई है कि जान-माल का नुकसान नहीं हो, इसके लिए हरसंभव उपाय किए जायें। प्रशासन ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हुए हैं। इससे पहले वर्ष 2013 में 8.06 लाख क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा गया था जिससे जल स्तर 207.32 मीटर तक पहुंच गया था । प्रशासन ने बाढ़ से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उनके रहने के लिए बड़ी संख्या में तंबुओं का प्रबंध किया है और बड़ी संख्या में लोगों को निकाल वहां पहुंचाया गया है। यमुना की तलहटी में रहने वाले कुल 23860 लोगों को निकालना जाना था और इनके लिए 2120 तंबुओं का प्रबंध किया गया है। प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति में किसी प्रकार की सहायता के लिए दो टेलीफोन नंबर 01122421656 और 011 21210849 भी जारी किए हैं।