लोगों को धमकी देकर खुलेआम कर रहे अवैध वसूली, पुलिस की मेहरबानी से घूम रहे बा

Whatsapp

इंदौर: अपराध की दुनिया में खुद को गैंगस्टर साबित करने के लिए अपराधियों की टीम बनाने की जरूरत होती है और टीम तब बनती है। जब खुद के पास खर्च करने को पैसे हो ऐसे में शॉर्टकट से शरीफों को ब्लैकमेल करना सब से सरल हो जाता है और जब पुलिस इन पर मेहरबान हो तो इनके इरादे और खूंखार हो जाते हैं। सद्दाब और समीर नाम के ये दोनों अपराधी अब इंदौर में ब्लैकमेलिंग का जाल बिछा चुके हैं, सद्दाब इंदौर के रानीपुरा में रहता है। ये व्यापारियों से हफ्ता वसूली का काम करता है, व्यापारियों को बेवजह परेशान करता है और आवाज उठाई तो अंजाम भुगतने की धमकी देता है। इसका साथी समीर चंदननगर का निवासी हैं जो जमीनों के हेर फेर में शामिल रहता है। सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करना इसका पेशा है। दोनो बदमाशों के खिलाफ दर्जनों अपराध दर्ज है लेकिन ये पुलिस थानों के कभी मेहमान नही बनते। जिले के लिए खतरा बन रहे इन बदमाशों की जिलाबदर की फ़ाइल थानों में ही दम तोड़ देती है और ये खुलेआम दहशत फैलाने से बाज नही आते।

अपराध की लंबी लिस्ट, फिर भी बाहर 
सद्दाब और समीर दोनो दोस्त हैं। दोनों मिलकर अपराध को अंजाम देते हैं और हिस्सा भी इन दोनों का बराबर का होता है । सद्दाब और समीर के खिलाफ थाना चन्दननगर में अपराध क्रमांक 693/05 में  आईपीसी की धारा 323,294,506 तो वही अपराध क्रमांक 403/13 में आईपीसी की धारा 307,147,148,149 के साथ आर्म्स एक्ट में भी मामला दर्ज है। इसके साथ ही साल 2019 में अपराध क्रमांक 1015 में आईपीसी की धारा 323,294,506 के तहत मामला दर्ज है। इसके साथ ही समीर और सद्दाब  के भी इंदौर के कई थानों में दर्जनों मामले दर्ज है। ये दोनों शातिर अपराधी छत्रीपुरा, सेन्ट्रल कोतवाली, पन्डेरिनाथ,जूनी इंदौर इलाके के भी शातिर अपराधी है। यहाँ के थानों में भी इनके खिलाफ दर्जनों मामले दर्ज है। लेकिन हैरत की बात ये है की ये अभी भी इन अपराधियों पर पुलिस जिलाबदर की कार्यवाही करने से दूर है।

घरों पर कब्जा करवाने का व्यापार
यह दोनों अपराधी इतने शातिर हैं कि घरों पर कब्जा करवाने  का ठेका भी लेते हैं। किसी भी भूमि का विवाद हो तो इनके पास चले आइए यह आपको किसी भूमि पर कब्जा दिलवा सकते हैं तो किसी के घर को भी खाली करवा सकते हैं। इंदौर के अनेक इलाकों में इन्होंने घरों पर कब्जा कर रखा है लेकिन मजबूर लोग इनसे अपने घरों को नहीं छुड़वा पा रहे हैं। हाल ये है कि दर्जनों शिकायतें इनके खिलाफ थानों में  होती हैं लेकिन कार्यवाही कुछ भी नहीं हो पाती, ऐसे में इनके इरादे और भी मजबूत होते जाते हैं सवाल ये उठता है कि आखिर पुलिस इन पर कार्यवाही करने को क्यों मजबूर है क्यो इन दोनों अपराधियों पर कोई भी कार्यवाही नहीं होती। आखिर यह किसके इशारे पर यह काम करते हैं इस पर भी चर्चा शुरू हो जाती है।

एक तरफ गुंडा अभियान दूसरी तरफ खुली छूट 
इंदौर पुलिस अपने गुंडा अभियान को लेकर पूरे भारत में प्रसिद्ध हो गई हाल यह था कि गुंडा अभियान के मॉडल को भारत के कई प्रदेशों में इस्तेमाल किया गया लेकिन जब बात इन अपराधियों पर कार्यवाही की आती है तो ये गुंडे खुलेआम घूमते हैं। इंदौर में छोटे-छोटे मामलों को लेकर अपराधियों पर जिला बदर की कार्रवाई हो जाती है लेकिन दोनों अपराधियों के खिलाफ चंदन नगर में दर्जनों मामले दर्ज हैं। इसके साथ ही इंदौर के कई इलाकों में और भी मामले दर्ज हैं। इसके बावजूद इन पर जिला बदर की कार्यवाही नहीं हो पाती न इनका गुंडा लिस्ट में नाम आता है न पुलिस निगरानी करती है ,छोटे-मोटे घरेलू प्रकरण में भी जिला बदर की कार्यवाही सुनिश्चित करने वाली इंदौर पुलिस इन शातिर अपराधियों को खुली छूट दे रही है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर किसके इशारे पर इनको भोले भाले लोगों को परेशान करने की छूट मिल रही है।