राखी के दिन बहनों के सामने तड़प-तड़प कर हुई इंजीनियर भाई की मौत

Whatsapp

वेस्ट दिल्ली: कोर्ट ने चाइनीज मांझों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद पुलिस प्रशासन की लापरवाही के कारण इस बार भी स्वतंत्रता दिवस पर लाखों का मांझा मार्केट में बेचा गया। जिससे हजारों पक्षियों की मौत हुई व हजारों जख्मी हो गए। जबकि कई लोग इसकी चपेट में आने से मर गए या फिर घायल गए। लेकिन इसकी चपेट में आने से जो लोग घायल हुए व जिनकी मौत हुई उनका जिम्मेदार कौन है? इस बारे में प्रशासन खामोश है। स्वतंत्रता दिवस पर पश्चिम विहार ईस्ट इलाके में एक स्कूटी चालक की चाइनीज मांझे की चपेट में आने से मौत हो गई। जबकि उसकी दो बहनें बाल-बाल बच गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस मामला दर्ज कर जांच कर रही है।

मानव शर्मा के रूप में हुई है युवक की मौत
हैरान करने वाली बात यह है कि इस तरह के जो मामले सामने आए हैं। उनमें आरोपी कौन कहां का है। पुलिस पता नहीं लगा पाई है। हर केस में वह अपनी अपनी मजबूरी बता देते हैं। मांझे से जान गंवाने वाले युवक की पहचान मानव शर्मा के रूप में हुई है। वह परिवार के साथ किशन विहान सेक्टर-1 रोहिणी  बुध विहार इलाके में रहता था। वह पेशे से सिविल इंजीनियर था। बीते वीरवार दोपहर करीब साढ़े 12  वह अपनी दो बहनों मोनिका शर्मा और स्नेहा को लेकर स्कूटी से हरी नगर जनकपुरी स्थित डिस्ट्रिक सेंटर एरिया में गया था। जहां पर उसकी मौसी रहती हैं। वहां पर राखी बंधवाने जा रहा था। जब वह पीरागढ़ी फ्लाईओवर पर पहुंचा कि अचानक उसके गले में कटी पतंग का चाइनीज मांझा लिपट गया। जिससे उसका स्कूटी से संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क पर काफी दूरी तक घसीटता हुआ गया। जिसमें उसकी दोनों बहनों को भी मामूली चोट लगी। गले में मांझा लिपटने के कारण उसकी गर्दन में गहरा घाव हो गया। दोनों बहनों ने एक कार चालक महिला  की सहायता लेकर बाला जी अस्पताल में भर्ती कराया। पीसीआर को हादसे की सूचना दी गई। दोनों बहनों ने परिवार से फोन पर संपर्क कर हादसे की जानकारी दी। मानव की उपचार के दौरान डॉक्टरों ने खून ज्यादा बह जाने और नस कटने की वजह से मृत घोषित कर दिया।

मानव ही था घर का मुखिया
रंजू शर्मा ने बताया कि 12 बजे तक सब खुश थे। लेकिन आधे घंटे बाद पता नहीं था कि बेटा सबको छोड़कर चला जाएगा। मानव के पिता अशोक शर्मा की पांच साल पहले देहांत हो गया था। वह सिविल इंजीनियर थे। जिनकी मौत के बाद मानव ने अपनी पढ़ाई छोड़कर अपनी दोनों बहनों को पढ़ाने और घर का पालन पोषण करने का जिम्मा उठाया था। वह परिवार के बारे में काफी ज्यादा सोचता रहता था। उसके चले जाने के बाद हम अनाथ से हो गए हैं। घर कैसे चलेगा। कौन बेटियों की पढ़ाई पूरी कर उनके हाथ पीले करेगा। कुछ समझ नहीं आ रहा है। मानव घर का मुखिया था।

‘कोई समय से अस्पताल पहुंचा देता तो बेटा जिंदा होता’ 
मानव की मां रंजू शर्मा ने बताया कि मानव को उन्होंने बस से जाने के लिए कहा था। लेकिन वह अपनी बहनों को लेकर निकल गया। उनको भी साथ में जाना था। जब हादसा हुआ, उस वक्त दोनों बेटियों ने मानव को खून से लथपथ हालत में सड़क पर पड़ा देखकर अनगिनत वाहन चालकों से सहायता मांगी थी। लेकिन किसी एक ने भी सहायता नहीं की। जबकि मौके पर कई लोगों ने अपने वाहनों को रोककर मानव को देखा भी था। अगर वो समय रहते मानव को अस्पताल पहुंचा देते तो शायद उसका बेटा आज जिंदा होता।  बाद में एक महिला ने मदद की लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। परिवार वालों का कहना है कि मानव अपनी बहनों को सबसे ज्यादा प्यार करता था। वह उनके लिए और माता पिता के लिए कुछ करना चाहता था। राखी को लेकर वह काफी खुश था। बहनों की वह लंबी उम्र की कामना करता रहता था। उनकी शादी सही जगह हो जाए, सोचता रहता था। लेकिन किसी को नहीं पता था कि जो राखी बंधवाकर अपनी मौसी के घर जा रहा है। वह अब जिंदा कभी भी नहीं आएगा। त्यौहार के घर में पूरी तरह से मातम छाया हुआ है।

पहले भी हुए हैं हादसे
15 अगस्त 2019-अक्षरधाम मंदिर के पास बच्चा घायल
3 अप्रैल 2019-तिमारपुर इलाके में रवि किशोर नामक युवक की गले में मांझा फंसने से मौत
22 जुलाई 2017-गीता कॉलोनी फ्लाईओवर पर बाइक सवार योगेश घायल
16 अगस्त 2016-रानी बाग इलाके में कार की छत से झांक रही बच्ची सांची गोयल की मौत
16 अगस्त 2016-एलिवेटेड रोड पर बाइक चालक की मौत
7 अगस्त 2018-नांगलोई इलाके में बाइक चालक किशोर कुमार गंभीर रूप से घायल
14 अगस्त 2016-गाजीपुर फ्लाईओवर बाइक चालक तोयज सिंह घायल

गिरफ्तारी भी हुई
बाहरी जिला के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेन्द्र सागर ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। पुलिस ने बाहरी जिला इलाके में चाइनीज मांझा बेचने वालों के खिलाफ अभियान चलाया और नौ दुकानदारों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनको गिरफ्तार किया गया। उनके कब्जे से हजारों रुपए का मांझा भी जब्त किया गया है।  पुरानी दिल्ली की लाल कुआं मार्केट पतंगों की सबसे बड़ी मार्केट है। प्रतिबंधित होने के बावजूद इस साल भी यहां पर आधा किलो का मांझा एक सौ बीस से डेढ़ सौ रुपए में बेचा गया। मांझे को खुलेआम नहीं रखकर दुकान में छुपाकर रखते हैं।