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1 अगस्त से अनलॉक- 3 स्वाभिमान और पुरुषार्थ के सहारे कट गये कोरोना काल के 4 महीने

राष्ट्र चंडिका (अमर नोरिया)कोरोना वायरस की आहट और बढ़ते संक्रमण को लेकर पूरे देश भर में 24 मार्च से लगाए गये लॉकडाउन और उसके बाद जारी अनलॉक के नियम कायदों के चलते कोरोना काल के 4 महीने धीरे-धीरे कट गए यह पता ही नहीं चला, बीते इन 4 महीनों में इस बात का एहसास हो गया कि आखिर इंसान की जिंदगी में जो कुछ उसको करना है उसे स्वयं के भरोसे ही करना होगा । इस कोरोना काल मे हजारों लाखों लोग ऐसे होंगे जिनके पास ना तो आय का कोई स्थाई जरिया होगा और ना ही कोई ऐसी धन संपत्ति होगी जिससे कि वह महीनों घर बैठकर ही अपनी अपनी जरूरतों को पूरा कर सकें ।  महत्वपूर्ण बात यह है कि उन हजारों लाखों लोगों की वर्तमान स्थिति सबसे बड़ी कोई ताकत है तो उनका अपना स्वयं का आत्मविश्वास ,स्वभिमान और पुरुषार्थ  है जो की इन 4 महीने में उन्हें इस भीषण त्रासदी से जूझते रहने का साहस देता रहा होगा ऐसे वह सभी लोग अपने स्वाभिमान और पुरूषार्थ के भरोसे ही उनके पास जो कुछ उपलब्ध था और जो कुछ उनकी बचत पूंजी थी उसको ही थोड़ा-थोड़ा उपयोग करके 4 महीनों में अपने जीवन की जो जरूरतें हैं उनमें खर्च किया । ऐसे लोगों को न तो सरकार की किसी योजना का लाभ मिले उसकी श्रेणी में आते हैं और न ही नोकरीपेशा हैं कि हर महीने सरकारी तनख्वाह उनके बैंक खाते में आ जाती हो । कोरोना संक्रमण के इस दौर में  सरकार को जब ऐसे हजारों लाखों लोगों को सहायता और सहयोग प्रदान करने की आवश्यकता थी तो उस दौरान इस देश में पेट्रोल डीजल सहित गैस के दाम बढ़ाए गये  और तो मध्य प्रदेश में आमजनों को जो राहत और अन्य योजनाओं का लाभ मिला वह सरकार की प्रमुखता के तय मापदंडों की कसौटी पर तय हुआ । इसी दौर में लोगों की नौकरियां छूटी, मजदूरों को काम नहीं मिला , छोटे छोटे व्यवसाय करने वालों के काम धंधे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं , कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनके कामकाज लॉकडाउन के बाद अनलॉक में भी अपने पुराने स्वरूप में नहीं लौट पा रहे हैं , फिर भी तमाम योजनाओं और लोगों को राहत देने की बातें की जा रही हैं जिसका प्रचार प्रसार भी हो रहा है । इतना सब होने के बाद भी हमें अपने आप की सुरक्षा और स्वास्थ्य की उचित जिम्मेदारी की गारंटी मिलती रहे यह सबसे महत्वपूर्ण है ।  संकट के इस दौर में जिस तरह से सरकारों को आगे आकर आम नागरिकों जिनके पास किसी तरह की व्यवस्थाएं नहीं है उन लोगों को किस तरह से सहायता देना है , उनके काम धंधे में किस तरह से सहयोग करना है यह सब बातों पर ध्यान देना था । देश में जब 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की गई थी तब आम जनों, छोटे छोटे व्यापारियों को कुछ आस बंधी थी, किंतु यह राहत पैकेज की घोषणा किए हुए 2 माह हो गए मगर यह पैकेज कहां गया और इसका लाभ किसे मिल रहा है यह आज तक समझ में नहीं आया ? कोरोना संक्रमण काल में मध्यप्रदेश में मची राजनीतिक उठापटक के बीच राजनीतिक कार्यक्रमों में चल रही भीड़भाड़ पर फिलहाल राजनेताओं के कोरोना पॉजिटिव के मामले सामने पर कुछ जागरूकता आई है । यह सब देखते सुनते जिस गति से 4 माह निकल गए उससे लगता है कि आने वाले कई और महीने भी इसी तरह गुजर जाएंगे और  स्वभिमानी और पुरुषार्थी लोग अपनी जमा पूंजी और जो अपना स्वयं का स्वाभिमान और पुरुषार्थ है इसके भरोसे ही इस महामारी से जूझते रहेंगे । बाकी अन्य जो लोग हैं वह भी लॉकडाउन और अब जारी  अनलॉक- 3 में भी “आपदा में अवसर  तलाश रहे हैं “और हमें भी अब जब तक कोरोना से इलाज की कोई पुख्ता दवाई या वैक्सिन नहीं बन जाती तब तक कुछ तरह से इसी कोरोना संक्रमण से बचाव करते हुए जीना है …

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