भारत में ही नहीं पाकिस्तान के लोगों की भी चहेती थी सुषमा स्वराज

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पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का 67 साल की उम्र में दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। साल 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद सुषमा स्वराज को विदेशमंत्री का पद सौंपा गया। इस पद को संभालने के बाद से ही जब कभी भी विदेश में रह रहे किसी भारतीय को मदद की जरूरत पड़ी, सुषमा स्वराज ने हर मुमकिन कोशिश की। उन्होंने कई बार विदेशों में फंसे भारतीयों को सकुशल घर वापसी कराई। बता दें सुषमा स्वराज भारत में ही नहीं पाकिस्तान के लोगों की भी चहेती थी। पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भारतीयों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं थी, विदेशों में रह रहे भारतीयों को जब कभी भी कोई समस्या या परेशानी हुई तब-तब बिना देर किए स्वराज ने उनकी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाए।
इतना ही नहीं पाकिस्तान के लोगों को भी जब-जब मैडीकल वीजा की जरूरत पड़ी सुषमा उनकी मदद से भी पीछे नहीं हटी। पाकिस्तान में तो लोग कहते हैं उनकी भारत में एक मां मौजूद हैं और वो सुषमा हैं। 14 फरवरी 1952 में हरियाणा के अम्बाला में जन्मी सुषमा स्वराज ने एस.डी. कालेज अम्बाला छावनी से बी.ए और पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से कानून की डिग्री ली
यमन में जब हाउथी विद्रोहियों और सरकार के बीच जंग छिड़ी तो हजारों भारतीय इस जंग के बीच में फंस गए। जंग लगातार बढ़ती जा रही थी और सऊदी अरब की सेना लगातार यमन में बम गिरा रही थी। इसी बीच यमन में फंसे भारतीयों ने विदेश मंत्री सुषमा स्वहराज से मदद की गुहार लगाई। यमन में फंसे भारतीयों के लिए सुषमा स्वाराज ने ऑपरेशन राहत चलाया और ऑपरेशन के दौरान साढ़े पांच हजार से ज्यांदा लोगों को बचाया गया। ये ऑपरेश इतना सफल रहा कि भारत ही नहीं यमन में फंसे 41 देशों के नागरिकों को इस ऑपरेशन के जरिए ही सुरक्षित बचाया जा सका। इसमें से 4640 भारतीय थे।
इसी तरह दक्षिण सूडान में छिड़े सिविल वॉर में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वतन वापस लाने के लिए विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने ऑपरेशन संकटमोचन की शुरुआत की। इस ऑपरेशन के तहत दक्षिण सूडान में फंसे 150 से ज्यादा भारतीयों को बाहर निकाला गया। इसमें 56 लोग केरल के शामिल थे।

लीबिया में सरकार और विद्रोहियों के बीच छिड़ी जंग में भी कई भारतीय वहां फंस गए थे। लीबिया से भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने की तैयारी तेज की गई और 29 भारतीयों को सुरक्षित भारत लाया गया। हालांकि इस दौरान एक भारतीय नर्स और उसके बेटे की मौत हो गई। कुछ ऐसा ही कोलकाता की जूडिथ डिसूजा केस में भी हुआ। जूडिथ को 9 जून को काबुल से अगवा कर लिया गया था। सुषमा स्वराज की कोशिशों के बाद अफगान अधिकारियों ने जूडिथ की रिहाई सुनिश्चित करवाई।