खींच-तान के बीच आखिरकार लोकसभा में हुआ तीन तलाक बिल पास

नई दिल्ली: तीन तलाक को निषेध करने वाले विधेयक पर विपक्ष की आशंकाओं को निर्मूल बताते हुए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने वीरवार को कहा कि तीन तलाक को पैगम्बर मोहम्मद ने गलत बताया और 20 इस्लामी देशों में यह निषिद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसे चलन को कोई जायज नहीं ठहरा सकता और ऐसे में नारी सम्मान एवं हिन्दुस्तान की बेटियों के अधिकारों की सुरक्षा संबंधी इस पहल का सभी को समर्थन करना चाहिए। रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019’ पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इस विधेयक को सियासी चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। यह इंसाफ से जुड़ा विषय है। इसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। यह इंसानियत, इंसाफ और मानवता से जुड़ा विषय है।

उन्होंने एक पुस्तक के कुछ अंशों को उद्धृत करते हुए कहा कि पैगम्बर मोहम्मद ने तीन तलाक पर इतनी बंदिश रखी। उन्होंने कहा कि जब यह गलत है, तब इसे कैसे जायज ठहराया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में इसे गलत बताया लेकिन इस दिशा में कुछ नहीं किया। सदन में ए.आई.एम.आई.एम. के असदुद्दीन ओवैसी ने विधेयक को पारित किए जाने के लिए आगे बढ़ाने का विरोध किया और मत विभाजन की मांग की। सदन ने इसे 82 के मुकाबले 303 मतों से अस्वीकार कर दिया।

इसके बाद कुछ सदस्यों के संशोधनों को हा और ‘ना’ के माध्यम से अस्वीकार कर दिया गया। सदन ने एन.के. प्रेमचंद्रन, अधीर रंजन चौधरी, शशि थरूर, प्रो. सौगत राय, पी.के. कुन्हालीकुट्टी और असदुद्दीन औवैसी द्वारा फरवरी में लाए गए अध्यादेश के खिलाफ सांविधिक संकल्प को भी अस्वीकार कर दिया। इसके बाद सदन ने विधेयक को मंजूरी दे दी। एन.डी.ए. के सहयोगी जद (यू) ने इस विधेयक का विरोध करते हुए सदन से वाकआऊट किया था।

तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस, द्रमुक सदस्यों ने भी सदन से वाकआऊट किया। इस विधेयक में तीन तलाक की प्रथा को शून्य और अवैध घोषित करने का और ऐसे मामलों में 3 साल तक की जेल और जुर्माने से दंडनीय अपराध तथा प्रथम श्रेणी न्यायिक मैजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय अपराध घोषित करने का प्रस्ताव है। यह भी प्रस्ताव किया गया था कि विवाहित महिला और आश्रित बालकों को निर्वाह भत्ता प्रदान करने और साथ ही अवयस्क संतानों की अभिरक्षा के लिए भी उपबंध किया जाए।