कोरोना से लड़ेगा ‘जुगाड़’: बढ़ते मामलों से चिंतित इंदौर शहर, बनाईं दो मशीनें

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इंदौर। ‘कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा, भानुमति ने कुनबा जोड़ा’ की तर्ज पर इंदौर नगर निगम ने ह्यूमन सैनिटाइजेशन मशीन बनाई है। इसमें जुगाड़ की तकनीक से अलग-अलग चीजें जोड़ी गई हैं। पहली मशीन सोमवार को अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लि. (एआईसीटीएसएल) परिसर में रखने की तैयारी है। उसके बाद इंदौर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कंपनी लि. और अन्य ज्यादा आवाजाही वाले कार्यालयों के बाहर रखी जाएगी। इंदौर में पहली बार इस तरह का प्रयोग किया जा रहा है। निगमायुक्त आशीष सिंह के निर्देश पर निगम के वर्कशॉप विभाग में ह्यूमन सैनिटाइजेशन मशीनें बनाई जा रही हैं। पहली मशीन रविवार शाम को तैयार हो गई। इससे पहले भोपाल स्मार्ट सिटी के ऑफिस में इस तरह की मशीन लगाई गई है। वहां किसी कंपनी ने मशीन उपलब्ध कराई है, जबकि इंदौर में निगम ने तैयार की है।

निगम वर्कशॉप प्रभारी मनीष पांडे ने बताया कि मशीन में पांच बाय सात फीट का एक पैसेज (खाली स्थान) बनाया गया है। उसमें एक तरफ से लोग दाखिल होंगे और सैनिटाइज होकर बाहर निकल सकेंगे। पैसेज के भीतर कुछ पाइप लगाए गए हैं और पैसेज कवर करने के लिए पारदर्शी प्लास्टिक के पर्दे लगाए गए हैं।

तेजी से सैनिटाइजर उड़ाएगी

जेटिंग मोटर मशीन में वाहनों की सर्विसिंग में इस्तेमाल होने वाली जेटिंग मोटर लगाई गई है। इसके जरिये पाइप में लगे स्प्रिंकलर लगातार सैनिटाइजर उड़ाते रहेंगे जिससे भीतर आने वाला व्यक्ति सैनिटाइज हो सकेगा। पैसेज के बाहर एक बेसिन बनाया गया है जिसमें साबुन और सैनिटाइजर रखा जाएगा, ताकि लोग हाथ धोने के लिए इस्तेमाल कर सकें। प्रभारी ने बताया कि जेटिंग मशीन 24-25 हजार रुपए की है और लगभग 700 रुपए के प्लास्टिक के परदे होंगे। इसके अलावा बाकी सामान वर्कशॉप से जुटाया गया है। इस तरह की तीन-चार मशीन बनाई जा रही हैं।

आईआईटी इंदौर ने दी वायरस का सैंपल तैयार करने वाली पीसीआर मशीन

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) इंदौर ने कोरोना वायरस टेस्ट में मदद करने के लिए अपनी 10 लाख रुपए कीमत की मशीन उपयोग करने के लिए दी है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज को संस्थान ने अपने बायोमेडिकल लैब में उपयोग में आ रही पोलीमरेज चैन रिएक्शन मशीन (पीसीआर) दी है। इस मशीन का उपयोग कोरोना की टेस्ट प्रक्रिया में किया जाता है।

वायरस का टेस्ट करने के पहले टेस्ट सैंपल को इस मशीन से गुजरना होता है। मशीन में मरीज के सैंपल को रखा जाता है और एक मिनट में 13 हजार से 14 हजार बार इसे घुमाया जाता है। साधारण शब्दों में समझे तो पीसीआर मशीन का काम टेस्ट के लिए सैंपल को विशेष स्थिति में तैयार करना होता है।

आगे के लिए मशीन देने को तैयार

आईआईटी के पीआरओ सुनिल कुमार ने बताया मशीन में तीन से चार डिग्री तापमान पर सैंपल टेस्ट के लिए तैयार होता है। बायोमेडिकल क्षेत्र में इस मशीन का उपयोग होता है। संस्थान के निदेशक प्रो. निलेश कुमार जैन ने बताया एमजीएम मेडिकल कॉलेज ने हमसे कहा था कि उनकी एक पीसीआर मशीन खराब हो गई है। अप्रैल महीने के लिए पीसीआर मशीन उपयोग करने के लिए ली है। हालांकि संस्थान को अगर आगे के समय के लिए मशीन चाहिए होगी तो हम इसके लिए तैयार है।