WHO ने कोरोना के खिलाफ भारत की जंग को सराहा, कहा- महामारी को हरा सकते हैं भारतीय

न्यूयॉर्क:  विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO ) ने कोरोनावायरस से मुकाबले के लिए भारत की कोशिशों की तारीफ की है।यूरोप और अमेरिका जैसे विकसित देशों ने जहां कोरोना को गंभीरता से नहीं लिया, वहीं भारत में इस पर तेजी से काम हुआ। WHO के विशेष प्रतिनिधि डॉ. डेविड नवारो ने देश में जारी लॉकडाउन का समर्थन करते हुए कहा कि भारत में गर्म मौसम और मलेरिया के चलते भारत के लोगों में बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता है और उम्मीद है कि उनका शरीर कोरोना को हरा दे।

डॉ. नवारो ने मलेरिया प्रोन एरिया और बीसीजी के टीके से बीमारी का असर कम होने जैसे तमाम सवालों के भी विस्तार से जवाब दिए। डॉ. नवारो ने कोरोना से मुकाबले के लिए मोदी सरकार की तरफ से उठाए गए सख्त कदमों की सराहना की। लॉकडाउन को लेकर लोगों को होने वाली परेशानियों पर उन्होंने कहा कि तकलीफ जितनी ज्यादा होगी, उससे उतनी ही जल्दी निजात मिलेगी। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया इस वक्त अभूतपूर्व संकट का सामना कर रही है। कोरोना को गंभीरता से लेने के लिए भारत के लोगों का शुक्रिया करते हुए उन्होंने कहा कि यह खामोशी से हमला करने वाला दुश्मन है। मुझे खुशी है कि भारत ने तुरंत एक्शन लिया। सरकार की पूरी मशीनरी ने मिलकर काम किया। प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक साथ आए।

डॉ. नवारो ने कहा कि भारत के पास इससे मुकाबला करने की अद्भुत क्षमता है। भारत ने सख्त कदम उठाए। लोगों को संक्रमण और बचाव की जानकारी दी। दूसरे देशों ने इस पर तेजी से काम नहीं किया। उन्होंने माना कि महज कुछ केस आने पर यह गंभीर समस्या नहीं है। अब आप देखिए कि अमेरिका में क्या हो रहा है। अगर यह स्थिति भारत में बनती, तो क्या होता, यहां तबाही आ सकती थी।

डॉ. नवारो ने कहा कु मैं भारत के लोगों से कहना चाहता हूं कि हमें इससे मिलकर मुकाबला करना है। हमने ऐसे किसी दुश्मन से पहले मुकाबला नहीं किया। हम सब खतरे में हैं। आज मुझे बीमारी नहीं है, लेकिन कल हो सकती है। मुझे अपने परिवार और कम्युनिटी को इससे बचाना है। इटली और अमेरिका में भारत से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बावजूद हालात बदतर होने के बारे में डॉ. नवारो ने कहा कि वहां समुदाय में वायरस घूमता रहा। उन देशों ने लक्षण मिलने पर भी लोगों को आइसोलेट नहीं किया। अगर आप तेजी से एक्शन नहीं लेते, तो मुश्किल बढ़ सकती है। तेजी से एक्शन लेना ही एकमात्र समाधान है। जैसा भारत में हो रहा है।