सिवनी में तथाकथित पत्रकारों का बोलबाला

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राष्ट्र चंडिका,सिवनी । सिवनी जिले  में फर्जी पत्रकारों की बाढ़ सी आ गई है। फर्जी पत्रकारों का कुकृत्य लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकरिता के मापदंड को तार-तार करने वाला है। पत्रकरिता इनके लिए सिर्फ भौकाल बनाने का माध्यम भर है जिसके चलते असली पत्रकारों को शर्मसार होना पड़ रहा है। ऐसे पत्रकारों के चलते जहां अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है, वहीं वास्तविक पत्रकारों को भी लोग संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं। तथाकथित फर्जी पत्रकारों की कारगुजारियों के चलते मीडिया और पत्रकरिता से आमजन का भरोसा उठने लगा है। गौरतलब है कि मीडिया को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का दर्जा प्राप्त है। आजादी की लड़ाई से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण में पत्रकारों की अहम भूमिका रही है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, गणेश शंकर विद्यार्थी, बालगंगाधर तिलक, विपिन चंद्र पाल, अबुल कलाम आजाद, बालकृष्ण शर्मा, मदनमोहन मालवीय, मुहम्मद अली जौहर, गोपाल कृष्ण गोखले, वीरेंद्र नाथ चटोपाध्याय, जी.सुब्रमण्यम, अटलबिहारी बाजपेयी, रामवृक्ष बेनीपुरी सहित स्वाधीनता आंदोलन से जुड़े लगभग सभी क्रांतिकारी किसी-ना-किसी अखबार से जुड़े थे। आमजन को अपने मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने एवं समाज की सच्चाई को हूबहू लोगों के सामने परोसने के कारण आज भी निष्पक्ष पत्रकारिता पर लोगों का अटूट विश्वास है। पत्रकार की लेखनी को लोग आज भी पत्थर की लकीर मानते हैं। इसी भरोसे के चलते आम आदमी अपनी हर छोटी-बड़ी समस्याओं के निस्तारण के लिए आज भी अखबारों पर अटूट विश्वास करता है। मगर आजकल गाडिय़ों पर प्रेस लिखवाए बहुरूपिया किस्म के लोगों ने पत्रकरिता की क्रेज को भारी नुकसान पहुंचाया है। क्षेत्र के बाजारों, सरकारी एवं गैर सरकारी दफ्तरों पर आजकल प्रेस लिखी तमाम गाडिय़ां दिख रहीं हैं। जिन्हें ना शब्दों का ज्ञान है और ना ही पत्रकरिता का शऊर है। इनका मकसद केवल भौकाल बनाकर आमजन से लगायत अधिकारियों एवं कर्मचारियों से धन ऐंठना मात्र है। जिनमें तथाकथित कुछ चैनलों एवं यूट्यूब के पत्रकार शामिल हैं। पत्रकारों के ठेकेदार इन्हें पांच सौ से एक हजार रुपए लेकर कार्ड बना कर दे दे रहे हैं। इसके बाद ये तथाकथि फर्जी पत्रकार कार्ड को गले में लटकाकर अधिकारियों, कर्मचारियों एवं पुलिसकर्मियों पर धौंस जमाना शुरू कर दे रहें हैं। चाहें उन्हें शब्दों का ज्ञान हो ना हो, खबरों की गंभीरता का अंदाजा हो ना हो व पत्रकारिता के मापदंडो का ज्ञान हो ना हो। बस भौकाल टाइट करना उनका मकसद है। इनका एकसूत्रीय कार्यक्रम दलाली करना है। दुर्भाग्य से वे इस काम में सफल भी हो जा रहे हैं।