भतीजे अखिलेश के करीब जाते ही चाचा से सरकारी बंगला छिनने की तैयारी; ट्रिपल एक्शन की पूरी पॉलिटिक्स समझिए

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लखनऊ: राजनीति चाचा-भतीजा के बीच दरार बनी थी। अब राजनीति ही चाचा और भतीजे को साथ लाई है। मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव आते ही चाचा शिवपाल यादव ने अखिलेश का हाथ थाम लिया। खुलकर डिंपल के लिए वोट मांग रहे हैं। राजनीतिक समीकरणों के बदलते ही शिवपाल को लेकर घेराबंदी शुरू हो गई।पहले शिवपाल की सुरक्षा में कटौती की गई। दूसरे CBI ने सरकार से रिवरफ्रंट घोटाले में शिवपाल की भूमिका की जांच की मंजूरी मांग ली। मामला यही नहीं थमा, अब मायावती से लेकर शिवपाल को अलॉट हुए बंगला को भी वापस लेने की तैयारी है।आइए आपको शिवपाल यादव पर ट्रिपल एक्शन को लेकर पूरा राजनीतिक युद्ध समझाते हैं…विधायक के तौर पर एलॉट है बंगलाये उसी सरकारी बंगले की तस्वीर है, जो शिवपाल को आवंटित हुआ था।जसवंतनगर सीट से शिवपाल सिंह यादव विधायक हैं। लखनऊ स्थित लाल बहादुर शास्त्री मार्ग पर बंगला उन्हें विधायक के तौर पर आवंटित है। यहां प्रसपा का कार्यालय चल रहा है। इस बंगले में 12 बेडरूम, 12 ड्रेसिंग रूम, 2 बड़े हॉल, 4 बड़े बरामदे, 2 किचन और स्टाफ क्वर्टर हैं। बंगले में 8 एसी प्लांट और 500 किलोवॉट के साउंड प्रूफ जनरेटर लगे हैं।सुरक्षा Z श्रेणी से Y की गईमैनपुरी चुनाव में अखिलेश और शिवपाल यादव एक साथ आ गए हैं।28 नवंबर को यूपी सरकार की सुरक्षा मुख्यालय से लेटर जारी हुआ। इसमें पूर्व मंत्री शिवपाल यादव की सुरक्षा Z से Y श्रेणी में कर दी गई है। यूपी सरकार के इस फैसले के बाद समाजवादी पूरी तरीके से भाजपा पर हमलावर हो गए हैं। यहां तक अखिलेश, शिवपाल और रामगोपाल ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देकर आलोचना की है। शिवपाल यादव ने कहा कि बीजेपी से इसकी उम्मीद थी और अब जनता और पार्टी के कार्यकर्ता मेरी सुरक्षा करेंगे। डिंपल यादव की जीत का अंतर अब और बढ़ेगा।रिवर फ्रंट घोटाले में CBI जांचरिवर फ्रंट सपा का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है। उस वक्त शिवपाल सिंचाई मंत्री थे।रिवरफ्रंट घोटाला मामले में CBI ने अपनी पड़ताल शुरू की है। इस मामले में 2 तत्कालीन आला अफसरों की भूमिका की पड़ताल शुरू हो सकती है। साथ ही तत्कालीन सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव की भूमिका की CBI जांच कर सकती है। रिवरफ्रंट घोटाले में CBI ने पूछताछ की अनुमति भी मांगी है। शासन ने निर्णय लेने के लिए सिंचाई विभाग से संबंधित रिकॉर्ड को तलब किया है।शिवपाल ने अखिलेश को दी छोटे नेताजी की उपाधिशिवपाल खुलकर अखिलेश को ‘छोटे नेताजी’ की उपाधि दे रहे हैं।शिवपाल सिंह यादव ने बीते बुधवार को लोगों से कहा कि वे सपा के प्रमुख अखिलेश को ‘छोटे नेताजी’ कहें। लोग पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव को ‘नेताजी’ कहते थे। मैनपुरी संसदीय क्षेत्र के जसवंत नगर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए शिवपाल यादव ने कहा, ‘आपने (अखिलेश) करहल में कहा कि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) जैसा नेता नहीं है। मैं कहना चाहता हूं कि मैनपुरी और सैफई के लोग फोन करते थे। उन्हें ‘बड़े मंत्री’ (वरिष्ठ मंत्री) और मुझे ‘छोटे मंत्री’ कहा जाता था। अब मैं चाहता हूं कि आप सभी अखिलेश को ‘छोटे नेताजी’ कहें।शिवपाल पर कार्रवाई पर क्या कहते है एक्सपर्टUP के वरिष्ठ पत्रकार प्रभा शंकर यह मानते हैं कि राजनीति में कोई कभी दुश्मन नहीं होता है। कब दोस्त दुश्मन हो जाए कब दुश्मन दोस्त हो जाए यह राजनीति में कोई समझ नहीं सकता। शिवपाल अखिलेश की खोने के बाद भाजपा की प्रतिक्रिया जो सामने आ रही है। उससे या लग रहा है कि आने वाले 2024 के चुनाव को लेकर बीजेपी अप प्लान शुरू कर चुकी है।क्योंकि यूपी में यादव वोट बैंक कब बड़ा प्रभाव है इसके अलावा ओबीसी और बैंक का भी प्रभाव उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा है। शिवपाल यादव पर हो रही कार्रवाई का नुकसान भाजपा को हो सकता है। मगर बीजेपी से पहले कोई ना कोई बड़ा राजनीतिक दांव खेलेगी। मैनपुरी लोकसभा का उपचुनाव परिवार की एकता और बीजेपी के लिए चुनौती दोनों बनकर सामने आई है।