पांच दिन बाद भी लापता हैं छात्रा के साथ छेड़छाड़ के आरोपी प्राचार्य महेश गौतम !

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किस किस शाला में गठित हैं कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न समिति! शिकायत पेटी का अता पता नहीं !
 राष्ट्र चंडिका,सिवनी।  शासकीय उत्कृष्ठ विद्यालय सिवनी में 16 साल की एक छात्रा के साथ अश्लील हरकतें करने वाले चर्चित एवं विवादित प्राचार्य पांच दिनों से लापता हैं। पुलिस उनकी पतासाजी में जुटी है पर उनका कोई सुराग अब तक नहीं मिल पाया है।
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग पर भी उंगलियां उठती दिख रही हैं। देखा जाए तो केंद्र सरकार के द्वारा 2013 में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न अधिनियम पारित किया था। इसके तहत जिस भी कार्यालय में 10 से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हों, वहां कार्य स्थल पर यौन उत्पीड़न समिति का गठन किया जाना अनिवार्य किया गया था।
सूत्रों ने कहा कि शैक्षणिक संस्थाएं चाहे वे सरकारी हों या निजि हर जगह पर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न समिति का गठन किया जाना चाहिए, एवं समय समय पर शालेय छात्र छात्राओं को ‘गुड टच‘ एवं ‘बेड टच‘ के बारे में विस्तार से जानकारी भी दी जाना चाहिए।
सूत्रों का कहना है कि सिवनी जिले में एक परंपरा बहुत ही लंबे समय से चली आ रही है। जिला स्तर पर विभाग के शीर्ष अधिकारी के द्वारा शासन के निर्देशों के परिपत्र तो जारी कर दिए जाते हैं, पर उनका पालन सुनिश्चित नहीं कराया जाता। एक तरह से देखा जाए तो यह महज रस्म अदायगी से कम नहीं रह जाता है। शासकीय उत्कृष्ठ विद्यालय में 25 नवंबर को घटित इस पूरे मामले में भी ऐसा ही कुछ होता प्रतीत हो रहा है।
क्या था मामला
उत्कृष्ठ विद्यालय के सूत्रों ने  राष्ट्र चंडिका से चर्चा के दौरान कहा कि शाला के प्राचार्य पर एक सोलह साल की छात्रा ने गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रा का आरोप है कि प्रचार्य महेश गौतम के द्वारा उसे और एक छात्र को प्रोजेक्ट के साथ अपने कक्ष में बुलाया गया था। इसके बाद छात्र का प्रोजेक्ट देखकर उसे जाने के लिए कह दिया गया किन्तु छात्रा को प्राचार्य के द्वारा कथित तौर पर रोक लिया गया था।
सूत्रों ने बताया कि इसके बाद छात्रा को प्राचार्य महेश गौतम के द्वारा कथित तौर पर अपने बाजू में बिठाकर उसके साथ अश्लील हरकत आरंभ कर दी गई। छात्रा घबराकर वहां से भागकर अपनी कक्षा में गई और उसने अपने साथ घटित वाक्ये का जिकर अपने संगी साथियों और कुछ शिक्षकों से किया। इसके बाद पीडिता ने अपने परिजनों को इस बारे में बताया और परिजनों के साथ छात्रा के द्वारा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के उपरांत पुलिस के द्वारा धारा 354, 354 क, 506 भादवि, 7, 8, 9 (एफ – 10) पाक्सो एक्ट 3 (1), (डब्लू) (आई), (3) (2) एससी एसटी एक्ट के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया था।
कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न समिति की भूमिका संदिग्ध!
इस पूरे मामले में जिस तरह की बात सूत्रों के द्वारा बताई जा रही है उसके हिसाब से शाला के अध्यापकों के संज्ञान में 25 नवंबर को ही यह बात आ गई थी कि शाला के प्राचार्य महेश गौतम के द्वारा नाबालिग छात्रा के साथ अश्लील हरकतें की गई हैं, तो उसके तुरंत बाद ही कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न समिति को हरकत में आ जाना चाहिए था। कहा जा रहा है कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न समिति के द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किए जाने पर छात्रा संभवतः पुलिस के पास जाने पर मजबूर हुई। अन्यथा यह मामला कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न समिति के द्वारा ही पुलिस को सौंपा जा सकता था।
कागजों पर हैं कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न समितियां!
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जिले भर के कार्यालय हों या शैक्षणिक संस्थान, हर जगहों पर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न समितियां कागजों पर ही दिखाई देती हैं। इन समितियों की बैठक कब कब होती है! इनके द्वारा अपने कार्यालय के कर्मचारियों अथवा शालाओं में छात्र छात्राओं को जागरूक करने के लिए क्या किया इस बात का हिसाब किताब लेने की सुध जिला प्रमुखों को नजर नहीं आती है।
उत्कृष्ठ विद्यालय में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न समिति गठित है अथवा नहीं, इसका पता करना पड़ेगा। अगर वहां इस तरह की समिति गठित है तो उसे तत्काल संज्ञान लेना चाहिए था। इस मामले में पुलिस सूचना दर्ज होने के पहले इस समिति को एक्शन में आ जाना चाहिए था। वैसे अनेक शालाओं में शिकायत पेटियां भी नहीं हैं। हम इस बारे में एक बार फिर पत्र जारी करेंगे।
गोपाल सिंह बघेल,
प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी,
सिवनी.