स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा असर, एंबुलेंस, टीकाकरण, डिलीवरी हट्स के काम बुरी तरह से प्रभावित

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फरीदाबाद: वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को निकाले जाने के विरोध में लामबंद हुए एनएचएम कर्मचारी,दो दिन अल्टीमेटम, सरकार ने नहीं लिया कोई फैसला तो हड़ताल हो सकती है लंबी।नेशनल हेल्थ मिशन(एनएचएम) कर्मचारियों की प्रदेश व्यापी हड़ताल का यहां भी असर हुआ। शुक्रवार को सैकड़ाें एनएचएम कर्मचारियों ने काम का बहिष्कार कर विरोध प्रदर्शन किया। इससे अधिकांश स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई। खासकर एंबुलेंस सेवा, टीकाकरण अभियान, डिलीवरी हट्स आदि पूरी तरह से बंद रहे। इसके अलावा आफिसाें में भी कामकाज बंद रहे।कर्मचारियों सरकार और विभाग को दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर विचार कर उसे लागू नहीं किया गया तो हड़ताल आगे भी बढ़ सकती है। आंदोलित कर्मचारियों ने सरकार पर शोषण करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि विभाग के अधिकारियों ने एनएचएम कर्मचारियों को खिलौना बना कर रखा है। जब मन चाहा, उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाती है।प्रदेश व्यापी हड़ताल की ये है वजहएनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल की असली वजह नूंह में कार्यरत डीएमईओ रिहान रजा और डीएएम ऋषिराज की सेवाएं अचानक समाप्त किया जाना है। कर्मचारियों का कहना है कि जो कर्मचारी अपने जीवन के 10-12 साल सरकार को दिए हैं उसे बिना उसका कोई पक्ष जाने मामूली गलती से हटा दिया जाना कहां का न्याय है। सजा देने के और भी विकल्प हो सकते हैं।750 कर्मचारी रहे हड़ताल परएनएचएम के तहत जिले की सभी स्वास्थ्य केंद्रों व जिला अस्प्ताल में कार्यरत 750 महिला-पुरुष कर्मचारी शुक्रवार को हड़ताल पर रहे। इनमें आफिस में कार्य करने वाले और एंबुलेंस कर्मचारी भी शामिल रहे। एनएचएम कर्मचारी संघ प्रधान धर्मेंद्र सिंह, धीरज कुमार, सुमन, नीतू, बलजीत, सुंदर सिंह, पदम सिंह, अनिल कुमार, डॉ. सुरेश आदि का कहना है कि एनएचएम कर्मचारियों कीकोई जॉब सुरक्षा गारंटी नहीं है। कोरोना काल में सभी कर्मचारियों ने अपनी जान की बाजी लगाकर काम किया है। बावजूद सरकार इन कर्मचारियों का शोषण कर रही है।आफिस व स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं हुआ कोई कामएनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ा है। 750 कर्मचारियों के हड़ताल में सभी एएनएम, एलटी, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स व डॉक्टर आदि शामिल थे। हड़ताल के चलते सीएमओ व डिप्टी सीएमओ आफिसाें में कोई काम नहीं हुआ। इसके अलावा एंबुलेंस सेवा बाधित रही। बच्चों का रूटीन टीकाकरण काम ठप्प रहा। अर्बन और रूलर एरिया में बने डिलीवरी हट बंद पड़े रहे।बीके अस्पताल परिसर में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते एनएचएम कर्मचारीकर्मचारियों की ये है मांगसंघ के प्रधाान धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि एनएचएम कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा की गारंटी दी जाए। कर्मचारियों की गंभीर शिकायत मिलने पर बिना जांच के लिए सेवा से न निकाला जाए। इसके लिए कष्ट निवारण कमेटी बनाई जाए। जिन कर्मचारियों की सेवाएं सरकार ने समाप्त की है उन्हें सेवा में बहाल किया जाए। साथ ही पिछले साल सरकार ने सातवां पे कमीशन देने का जो ऐलान किया था उसे दिया जाए आदि।