उपराष्ट्रपति चुनाव में भाजपा के पास अकेले ही उम्मीदवार जिताने की क्षमता

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नई दिल्ली। भाजपा के पास उप-राष्ट्रपति चुनाव में अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए पर्याप्त वोट हैं। ऐसा इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि उपराष्ट्रपति के चुनाव में मनोनीत सांसदों सहित केवल लोकसभा और राज्यसभा के सांसद ही मतदान कर सकते हैं। 1 जुलाई को उच्च सदन में उसकी ताकत घटकर 92 सांसद की रह गई है।
लोकसभा में भाजपा और एनडीए के पास व्यापक बहुमत प्राप्त है। भाजपा ने उपचुनाव में दो सीटों पर जीत हासिल की है। इसके साथ ही लोकसभा में बीजेपी सांसदों की संख्या 303 हो गई है। राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा को सहयोगियों और मित्र दलों के समर्थन की आवश्यकता पड़ी है। इस चुनाव में लोकसभा के 543 और राज्यसभा में 232 सांसद वोट करते हैं। भाजपा को हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा चुनावों में तीन सीटों का नुकसान हुआ है। उपराष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी के पास कुल 395 सांसद यानी वोट हैं, जो कि जीत के लिए जरूरी 388 से सात अधिक हैं।चुनाव आयोग ने 2022 के उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। 6 अगस्त को मतदान होगा। मौजूदा उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को समाप्त हो रहा है। नए उपाध्यक्ष आगामी मानसून सत्र के दौरान कार्यभार संभालेंगे और उच्च सदन की अध्यक्षता करेंगे।  राष्ट्रपति चुनाव के लिए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन बहुमत के निशान से लगभग 1 प्रतिशत कम है। अकेले भाजपा के पास 42 प्रतिशत से अधिक वोट हैं।
हालांकि, नवीन पटनायक के बीजू जनता दल (लगभग 3 प्रतिशत वोट), जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (4 प्रतिशत  से अधिक वोट) और अकाली दल (0.16 प्रतिशत  वोट) ने समर्थन देने का वादा किया है। इसके बाद एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू की जीत तय मानी जा रही है। विपक्ष के पास उपराष्ट्रपति चुनाव में जीतने की बहुत कम संभावना है, हालांकि उसके उम्मीदवार को मैदान में उतारने की संभावना है। एक विपक्षी नेता ने कहा “एनडीए के उम्मीदवार उम्मीदवार बिना लड़ाई के नहीं जीतेंगे। ये चुनाव राजनीतिक और वैचारिक लड़ाई हैं।” एनडीए और विपक्ष दोनों ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है।