क्‍या महाराष्‍ट्र में ठाकरे सरकार की उल्‍टी गिनती शुरू हो गई है

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महाराष्‍ट्र में इस वक्‍त सत्‍ता का अजब खेल चल रहा है। उद्धव ठाकरे सरकार मंत्री एकनाथ शिंदे ने अपनी ही सरकार के खिलाफ बगावत का ऐलान कर दिया है। एकनाथ शिंदे के साथ शिवसेना के 41 विधायक भी बागी हो गये है। शिवसेना के पास कुल 55 विधायक है। ऐसे में क्‍या अब शिवसेना महाराष्‍ट्र में क्‍या अपना बहुमत खो चुकी है। क्‍या कर्नाटक, मध्‍यप्रदेश की तरह ही भारतीय जनता पार्टी महाराष्‍ट्र में भी जोड तोड़ की राजनीति करके अपनी सरकार बनाने वाली है। महाराष्‍ट्र में आखिर होने क्‍या वाला है। इस लेख में हम आपको महाराष्‍ट्र कुछ ऐसे सियासी समीकरण बनाने वाले है। जिसे देखकर आपको महाराष्‍ट्र के सियासी उलटफेर के बारे में काफी कुछ जानने को मिलेगा। Draupadi Murmu kaun hai | राष्‍ट्रपति पद की उम्‍मीदवार द्रौपदी मुर्मू कौन हैएकनाथ शिंदेक्‍या कहता है महाराष्‍ट्र का सियासी समीकरण महाराष्‍ट्र में हो रहे सियासी ऊहापटक का इस राज्‍य की राजनीति पर क्‍या असर पड़ सकता है। इसको जाने की पहले आपको महाराष्‍ट्र में बहुमत के खेल को समझना पड़ेगा। महाराष्‍ट्र में इस वक्‍त विधानसभा की कुल 288 सीटे है। इस राज्‍य में सरकार बनाने के लिए बहुमत 143 सीटे चाहिए होती है। जो पार्टी या गठबन्‍धन 143 सीटे प्राप्‍त कर लेती है उसे बहुमत मिल जाता है। इस वक्‍त महाराष्‍ट्र में राष्‍ट्रवादी कॉग्रेस पार्टी, एनसीपी और शिवसेना के गठबन्‍धन से उपजी महाविकास अघाड़ी के पास 152 विधायक है। इसलिए इन तीनो पाटियो ने आपसी साझेदारी से महाराष्‍ट्र में अपनी सरकार बना ली है। अब इस ताजा घटनाक्रम के बाद शिवसेना के तकरीबन 40 विधायक बागी हो गये है।Yoga kya hai | योग करने के 5 फायदेछ अन्‍य निर्दलिय विधायक भी पार्टी से सम्‍पर्क से बाहर है। यदि इन सभी बागी विधायको ने एकनाथ शिंदे के कहने पर अपनी पार्टी से इस्‍तीफा दे दिया। तो महाराष्‍ट्र विधानसभा में शिवसेना के विधायको कर सख्‍या सिर्फ 125 रह जायेगी। लेकिन ये करना एकनाथ शिंदे के लिए इतना भी आसानी नही होने वाला। क्‍योकि ऐसा करने पर उनके ऊपर दलबदल कानून लागू हो सकता है। एकनाथ शिंदे शिवसेना के बागी विधायको के समर्थन से विधानसभा में अपनी एक अलग पार्टी बना सकते है। इस पार्टी को अगर सभी बागी विधायको का समर्थन मिल गया। तो वो चुनाव आयोग के सामने शिवसेना के अपने चुनाव चिन्‍ह के लिए दावा ठोक सकते है। क्रिकेटर प्रवीण ताम्‍बे की कहानी | 41 साल में डेब्‍यू करने वाले प्रवीण ताम्‍बे कौन हैऐसे में अगर शिवसेना के ये बागी विधायक वापस घर वापसी नही करते है। तो चुनाव आयोग की भूमिका काफी अहम हो जाती है। चुनाव आयोग विधायको और बहुमत के सर्मथन के आधार पर किसी गुट को एक पार्टी होने की मान्‍यता देता है। ऐसे सिचुएशन में वो गुट जिसे विधायको का बहुमत होता है उसे ही उस पार्टी का चुनाव चिन्‍ह दे दिया जाता है। अगर ऐसा होता है तो महाराष्‍ट्र विधानसभा में महा विकास अघाड़ी के विधायको की संख्‍या घटकर 112 रह जायेगी। ऐसे इसलिए होगा क्‍योकि 46 विधायको के इस्‍तीफे के बाद सदन में बहुमत का नया आकड़ा सिर्फ 121 रह जायेगा। इससे सदन में महा विकास अघाड़ी की संख्या घटकर 112 रह जाएगी. 46 विधायकों के इस्तीफे के बाद सदन में बहुमत का नया आंकड़ा 121 हो जाएगा.अब यहा ध्‍यान देने वाली बात ये है कि बीजेपी के पास महाराष्‍ट्र में इस वक्‍त 113 विधायक है। वो ये दावा कर सकती है कि उसके पास बहुमत के लिए जरूरी विधायको का समर्थन है। बीजेपी फिलहाल बहुमत 8 विधायक दूर है। अगर शिवसेना के ये 40 विधायक पाला बदलने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें दलबदल विरोधी कानून के तहत इस्तीफा देना होगा और उपचुनाव में फिर से निर्वाचित होना होगा.