भाजपा के हाथ से निकल सकती है बाजी

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पैराशूट कार्यकर्ता क्या दिखा पाएंगे चमत्कार
-शिखर से शून्य  पर पहुंची सत्ताधारी पार्टी
एक व्यक्ति ने ही ले लिए टिकट का निर्णय
-चयन समिति बनी शोभा की सुपारी
-भगवान भरोसे चल रही पार्टी
राष्ट्र चंडिका,सिवनी । नगरीय  निकाय के चुनाव में जिस तरह की टिकट वितरण की गई है उससे स्पष्ट झलक रहा है कि एक पार्टी ने सत्ता में रहते हुए हाथी की तरह मदमस्त  रहते हुए उन युवाओं के सपनों को चकनाचूर कर दिया है ऐसे प्रत्याशियों को टिकट दिया है जिन्होंने भाजपा कार्यालय की चौखट तक नहीं चढ़ी और उनकी सदस्यता तक नहीं है ऐसे में ऐसा संभव नहीं लगता पंडित दीनदयाल उपाध्याय एवं श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों की पार्टी कहलाने वाली पार्टी उस समय कार्यकर्ताओं को भूल जाती है जब उन्हें टिकट देने की बात आती है शेष समय झंडा लगाने, पोस्टर लगाने, दरी बिछाने का काम इन कार्यकर्ताओं को सौंपा जाता है।
हाल ही में क्लब के सफेद कपड़े पहनने वाले पैराशूट नेताओं की भरमार नजर आ रही है इन नेताओं को जिन स्थानों से टिकट दिया गया है वहां से इनके पराजय की शत प्रतिशत संभावना बनी हुई है। वर्तमान अध्यक्ष ने टिकट वितरण के दौरान अपना भविष्य देखते हुए किट का वितरण किए जाने की बात पार्टी में जन चर्चा का विषय बनी हुई है।
वर्तमान में कार्यकर्ता यह कह रहे हैं कि ‘ मुंह में राम बगल में छुरी’ जिन कार्यकर्ताओं को आश्वासन दिया गया था कि उन्हें वह टिकट दिलवा आएंगे अब अध्यक्ष या कह रहे हैं कि मैंने तो नाम भेजा था मगर विधायक सांसद एवं पूर्व विधायक एवं पूर्व अध्यक्ष ने अपने प्रत्याशियों के नाम आगे लाकर मेरे नाम पर आपत्ति लगाई जिससे उनके समर्थकों को टिकट नहीं मिला।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि टिकट चयन समिति में भले ही अनेक लोगों थे मगर पार्टी की ओर से टिकट वितरण की सूची अध्यक्ष नहीं बनवाई है और विधायक ने एक भी नाम परिवर्तन नहीं किया सब कुछ निर्णय अध्यक्ष ने लिया है नाम वापसी की तिथि नजदीक है मगर आक्रोश के चलते दी गई टिकट के प्रत्याशियों को हराने के लिए अभी से रणनीति में जुट गए हैं यह आक्रोश थमेगा ऐसा लगता नहीं है।
नगर के 07 वार्डों में एक विशेष समुदाय का वाहुल्य है जहां से भाजपा को परास्त मिलने की संभावना है इसी तरह महिलाओं और आरक्षित वार्डों में पार्टी ने कोई ऐसे कार्यकर्ता को टिकट नहीं दिया जिसके चलते भाजपा शिखर से शून्य पर पहुंच गई है।
बूथ में मतदान कराने के लिए भी इस बार पार्टी के ईमानदार कार्यकर्ता मिलेंगे इसकी कोई गारंटी नहीं वही जिस वार्ड में भाजपा के पुराने पार्षद रहे उन्होंने क्षेत्र में काम ना कर भाजपा का जनाधार भी खो दिया है और शेष कसर नगर पालिका अध्यक्ष रही भाजपा महिला ने पूरी कर दी थी।
वर्तमान के चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन और कार्यकर्ताओं का गिरता मनोबल भाजपा के पतन का अंदेशा है जिस पर विचार करने की आवश्यकता है लेकिन इस बार तो बाजी भाजपा के हाथ से निकल चुकी है। और भाजपा के लिए आगे की राह नंगी तलवार पर नंगे पैर चलने जैसी है कोई चमत्कार है जो भाजपा को इस समय उबार पाये।