कोचिंग संस्थान में टूट रहे सुरक्षा मानक

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राष्ट्र चंडिका सिवनी । सूरत में आग लगने से मारे गए कोचिंग के 22 छात्र-छात्राओं की मौत के बाद शहर के कोचिंग संस्थानों को अल्टीमेटम दिया गया था। लेकिन एक माह का समय बीत जाने के बाद भी कोचिंग संस्थाओं के हालात नहीं बदले हैं। कि जिले में कोचिंग संस्थान अवैध रूप से चल रही है और सूरत की घटना से भी जिला प्रशासन ने सबक नहीं लिया है। जिम्मेदार अधिकारियों ने खाना पूर्ति की तरह जांच कर अपने कर्तव्य की पूर्ति कर ली है। जिले में लगभग डेढ़ दर्जन कोचिंग संस्थाएं संचालित है। कई संस्थानों ने अपने कोचिंग संस्थानों के वीआईपी और बड़े नाम रखे हैं, लेकिन उनके पास सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। बच्चों की सुरक्षा ताक पर रखी जा रही है।
शहर में कोचिंग संस्थान बिना पंजीयन के ही चल रहे हैं। किसी भी विभाग द्वारा कोई रिकार्ड नहीं रखा जा रहा था। सूरत की घटना के बाद जब प्रशासन सक्रिय हुआ तो ये मामले भी सामने आए थे। वाणिज्यिक कर विभाग ने बीते साल कुछ स्थानों से प्रोफेशनल टेक्स जमा कराया था। एक भी संस्थान का जीएसटी नंबर नहीं है। कोचिंग संस्थान बच्चों से लाखों रुपए की फीस जुटा रहे हैं, लेकिन उनकी मॉनिटरिंग नहीं की जा रही है। हालांकि इस साल प्रशासन ने कोचिंग सेंटर के बारे में जानकारी जुटाई है।
नहीं है पार्किंग
इन कोचिंग संस्थानों के पास पार्किंग नहीं है। वाहन सडक़ पर खड़े किए जा रहे हैं। इससे आसपास के लोगों को भी दिक्कत है। स्थिति यह निर्मित होती है कि बच्चे दूसरों के मकानों के आगे अपने वाहन खड़े करते हैं। अगर किसी को आपात स्थिति में घर से बाहर या अस्पताल तक जाना हो तो जा नहीं सकते। इससे आसपास के लोगों से विवाद हो रहे हैं।
होने चाहिए ऐसे इंतजाम
कोचिंग संचालकों को फायर सेफ्टी के साथ-साथ बारिश के मद्देनजर भी सुरक्षा के इंतजामों पर ध्यान देना होगा। बच्चों के लिए कक्षाओं में प्रवेश एवं निर्गम के अलग-अलग द्वार की व्यवस्था करने, क्षमता से अधिक बच्चों को प्रवेश न देने, साफ -सफाई के समुचित इंतजाम करने तथा विद्युत फिटिंग एवं वायरिंग की समय समय पर जांच कराने चाहिए। कोचिंग संचालकों को कोचिंग क्लासेस के लिए ऐसे स्थानों या भवनों का चयन करना होगा जहां फायर ब्रिगेड आसानी से पहुंच सके। कोचिंग संस्थानों में लगे अग्निशमन यंत्रों को निरन्तर अपडेट रखना चाहिए। तय समय पर रिफिल कराने और अग्निशमन यंत्रों के संचालन के लिए स्टॉफ के सभी सदस्यों को प्रशिक्षित होना चाहिए। जर्जर भवनों में कोचिंग क्लासेस में संचालन ना किया जाए।
ये है जरूरी
फस्र्ट एड- सबसे जरूरी फस्र्ट एड भी नहीं हैं। अगर किसी बच्चे को चोट आ जाए तो अस्पताल में ही इलाज मिल पाएगा।
जरूरी नंबर : छात्राओं के साथ पीछा करने, छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसके बाद भी कोचिंग संस्थानों के पास कंट्रोल रूम और पुलिस के जरूरी नंबर भी नहीं हैं।
गेट : बच्चों को संस्थान से बाहर निकलने एक गेट ही हैं, वह भी सकरा, जबकि दो गेट होना चाहिए।
सीसीटीवी कैमरा: संस्थानों पर सीसीटीवी कैमरा होना चाहिए, लेकिन अब तक जिन संस्थानों की जांच हुई है, उनमें से अधिकतर में सीसीटीवी कैमरा नहीं मिले।
सुरक्षा गार्ड : कहीं भी सुरक्षा गार्ड नहीं मिले। बच्चे खुद ही अपने वाहनों को रखते और उठाते हैं।