सिवनी में पत्रकार बनाने की मशीन तो नहीं !

राष्ट्र चंडिका सिवनी. प्रदेश के कई जिलों में इनदिनों फर्जी पत्रकार बनने और बनाने का गोरख धंधातेजी से बढ़ता जा रहा है! सड़कों पर दिखने वाली हर चौथी गाड़ी में से एक गाड़ी में जरूर प्रेस लोगो दिखता नजर आ जाएगा! कई शहरों में अब तो पुलिस ने ऐसे फर्जी पत्रकारों के गैंग सहित उनकी बिना कागजात वाली गाड़िया भी सीज करनी शुरू कर उनके फर्जी आईडी प्रेस कार्ड के आधार पर मुकदमा भी लिखना शुरू कर दिया है!
ये फर्जी पत्रकार अपनी गाड़ियों में बड़ा बड़ा प्रेस का मोनोग्राम तो लगाते ही है साथ ही फर्जी आईडी कार्ड भी बनवाकर अधिकारियो व लोगो को रौब में लेने का प्रयास भी करते है!
कुछ संस्थाए तो ऐसी है जो 1000 रूपये से लेकर 5000 हजार रूपये जमा करवाकर अपनी संस्थान का कार्ड भी बना देती है और बेरोजगार युवकों को गुमराह कर उनसे धन उगाही करवाती है लेकिन पकडे जाने पर वो संस्थाए भी भाग खड़ी होती । लगातार बढ़ती फर्जी पत्रकारों की संख्या से न सिर्फ छोटे कर्मचारी से लेकर अधिकारी परेशान है बल्कि खुद समाज के सम्मानित पत्रकार भी अपमानित महसूस नजर आते है!
कुछ फर्जी पत्रकार तो अपनी गाड़ियों के आगे पीछे से लेकर वीआईपी विजिटिंग कार्ड भी छपवा रखे है जो लोग पुलिस की चेकिंग के दौरान उनको प्रेस (मीडिया) की धौस भी दिखाते है। गाड़ी रोकने पर पुलिस कर्मी से बत्तमीजी पर भी उतारू हो जाते है। इनमे से तो बहुत से ऐसे पत्रकार है जो पेशे से तो भूमाफिया और अपराधी है। जिनपर न जाने कितने अपराधिक मुक़दमे भी दर्ज है लेकिन अपनी खंचाड़ा गाड़ी से लेकर वीआईपी गाड़ी पर बड़ा बड़ा प्रेस मीडिया छपवा कर मीडिया को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते! लेकिन अब ऐसे पत्रकारों को चिन्हित कर पुलिस विभाग के साथ साथ सम्मानित पत्रकार संघ अपमानित करेगा जो पत्रकारिता के चौथे स्तम्भ को बदनाम करेगा! ये कार्यवाही यू.पी.के कई जिलों में शुरू हो गयी है पत्रकारिता के नाम पर अपराधी किस्म के लोग पुलिस से बचने के बजाय अब जाएंगे जेल ! यह कार्यवाही उत्तराखण्ड मे भी होनी चाहिये इस कार्यवाही से फर्जी पत्रकार होंगे बेनकाब और अपराध मे भी आयेगी कमी । इस आदेश के मुताबिक प्रदेश सरकार के अनुरोध के हिसाब से राहत सिर्फ उन्हीं पत्रकारों को मिलेगी जिन पर या तो सरकार ने पत्रकार होने का ठप्पा लगा रखा है ..या सरकार लगाएगी….बाकी किसी को इस आदेश का लाभ नहीं मिलेगा…. इसका विरोध होना चाहिए….फील्ड में दिन-रात जो पत्रकार दौडते-भागते हैं उनमें से अधिकांश गैर मान्यता प्राप्त हैं….
वहीं हमारे सूत्रों की माने तो कुछ ऐसे भी तथाकथित पत्रकार हैं जो अपने काले धंधे को छिपाने के लिए पत्रकारिता में आये हैं। हम उनके नाम तो प्रकाशित नहीं करेंगे लेकिन यह बता देना चाहते हैं कि पत्रकारिता को बदनाम करने वाले ऐसे तथाकथित पत्रकारों पर गाज गिरनी चाहिए।
सिवनी से प्रकाशित होने वाले अखबार के पूरे साल भर के रिकार्ड व आरएनआई की प्रतिलिपि अनुविभागीय अधिकारी को मांगनी चाहिए जिससे दूध का दूध और पानी का हो सके। वहीं दूसरे जिले के अखबारों व चैनलो की एजेंसी लेने वाले पत्रकारों पर पैनी नजर रखते हुए उनसे अपाइनमेंट लेटर की भी जांच करनी चाहिए। यदि इस प्रकार की कार्यवाही शीघ्र ही नहीं की गई तो सिवनी जिले में और भी कई तथाकथित पत्रकार रोज पैदा होते रहेंगे जो प्रशासन के लिए चिंता का विषय है।